सोमवार, 6 अप्रैल 2026
शनिवार, 16 सितंबर 2017
लो क सं घ र्ष !: काँग्रेस मठाधीश ने अपने प्यादोँ से प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को घेरा
इस लिहाज से अगर यह कहा जाए कि वर्तमान अध्यक्ष दिखाने के अध्यक्ष तो खुद हैँ लेकिन पर्दे के पीछे से काँग्रेस की बागडोर उस मठाधीश ने थाम रखी है ।
रविवार, 1 जनवरी 2012
शुभ हो नववर्ष
नया वर्ष आ गया; वर्ष 2012 आ गया; पुराना वर्ष 2011 चला गया। इस समय समाचारों में लोगों का उत्साह दिखाया जा रहा है। घर के कमरे में बैठे-बैठे हमें यहां उरई में खुशी में फोड़े जा रहे पटाखों का शोर सुनाई दे रहा है। लोगों की खुशी को कम नहीं करना चाहते, हमारे कम करने से होगी भी नहीं।
कई सवाल बहुत पहले से हमारे मन में नये वर्ष के आने पर, लोगों के अति-उत्साह को देखकर उठते थे कि इतनी खुशी, उल्लास किसलिए? पटाखों का फोड़ना किसलिए? रात-रात भर पार्टियों का आयोजन और हजारों-लाखों रुपयों की बर्बादी किसलिए? कहीं इस कारण से तो नहीं कि इस वर्ष हम आतंकवाद की चपेट में नहीं आये? कहीं इस कारण तो नहीं कि हम किसी दुर्घटना के शिकार नहीं हुए? कहीं इस कारण तो नहीं कि हमें पूरे वर्ष सम्पन्नता, सुख मिलता रहा?
इसके बाद भी नववर्ष के आने से यह एहसास हो रहा है कि बुरे दिन वर्ष 2011 के साथ चले गये हैं और नववर्ष अपने साथ बहुत कुछ नया लेकर ही आयेगा। देशवासियों को सुख-समृद्धि-सफलता-सुरक्षा आदि-आदि सब कुछ मिले। संसाधनों की उपलब्धता रहे, आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे।
कामना यह भी है कि इस वर्ष में बच्चियां अजन्मी न रहें; कामना यह भी है कि महिलाओं को खौफ के साये में न जीना पड़े; कामना यह भी है कैरियर के दबाव में हमारे नौनिहालों को मौत को गले लगाने को मजबूर न होना पड़े; कामना यह भी कि कृषि प्रधान देश में किसानों को आत्महत्या करने जैसे कदम न उठाने पड़ें; कामना यह भी कि भ्रष्टाचारियों की कोई नई नस्ल पैदा न होने पाये और पुरानी नस्ल का विकास न होने पाये....कितना-कितना है कामना करने के लिए....नये वर्ष के साथ होने के लिए।
आइये चन्द लम्हों के आयोजन में हजारों-लाखों रुपयों की बर्बादी कर देने के साथ-साथ इस पर भी विचार करें। इस विचार के साथ ही आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनायें...कामना है कि आप सभी को ये वर्ष 2012 सुख-सम्पदा-सुरक्षा-सम्पन्नता-सुकून से भरा मिले।
मंगलवार, 26 जुलाई 2011
शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011
डोंगरे की 'शादी पर सीधी बात' (SHADI PAR BAHAS)
'जर्नलिस्ट अमर उजाला'
लोग शादियां क्यों करते हैं? ये तो वे ही जानें, और मैं शादी क्यों कर रहा हूं। यह आपको ३० अप्रैल के बाद पता चल जाएगा। जब आप थोड़ा पसर्नल डोंगरे से रूबरू हो सकेंगे। फिलहाल बहस में हिस्सा लेते हुए हम आपको कुछ सोचना के लिए मजबूर कर रहे हैं।
कई यूथ अपनी लाइफ को डिस्टर्ब नहीं करना चाहते। इसलिए भी अविवाहित रहने का मन बना लेते हैं। यह गल्र्स और ब्वॉयज दोनों पर लागू होता है। फिर सब शादी करके ही कौन-सा तीर मार लेते है। वहीं दूसरा पहलू यह भी है कि ज्यादातर शादीशुदा जोड़े देश की आबादी बढ़ाने में अतिमहत्वपूर्ण सहयोग देना जरूर अपना कत्र्तव्य समझते हैं।
हम शादी क्यों करना चाहते क्योंकि...?
- शादी व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं.
- सदियों से चली आ रही शादी की परंपरा को निभाना चाहते हैं.
- अपने खानदान को चलाने के लिए वंश प्राप्त करना चाहते हैं.
- या कि सिर्फ शारीरिक सुख, सुरक्षित सेक्स हासिल करने के लिए शादी करना चाहते हैं.
- क्या ज्यादातर शादियां देश की आबादी बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।
क्या एक व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए शादी की जाए?
तो मुझे नहीं लगता कि हर व्यवस्था का हिस्सा बनना सभी के लिए जरूरी है। और बात जहां तक वंश चलाने के लिए संतान हासिल करने की होती है, तो आज के आधुनिक युवाओं के लिए यह कोई इश्यु नहीं रह गया है। अविवाहित रहने वाले ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं सोचते। इनमें से कुछ लोग बच्चों को गोद ले लेते हैं। बिना शादी के भी आप माता-पिता होने की जिम्मेदारी निभा सकते है।
अब हम बात सेक्स या शारीरिक जरूरत पूरी करने के लिए शादी की करते हैं। ?
तो ज्यादातर युवा इन दिनों शादी से पहले या बाद में सेक्स के लिए शादी की अनिवार्यता को नकारते नजर आ रहे हैं। फिर भी ज्यादातर युवा सुरक्षित सेक्स के लिए शादी करने का ही विकल्प अपनाते हैं। क्योंकि बगैर शादी के सेक्स का रास्ता सभी के लिए उतना आसान नहीं है। बहुत सारे लोग शादी से कतराते हैं। इसका एक कारण यह है कि लड़के किसी अन्य का दायित्व उठाने से बचना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि वे अपनी बीवी के नखरे और डिमांड को पूरा नहीं कर पाएंगे।
उधर, दूसरी तरफ लड़कियों का भी शादी से मोहभंग होता जा रहा है। क्योंकि उनको लगता है कि शादी उनके कॅरियर पर विराम लगा देती है। कई मामलों में यह सच भी साबित हुआ है। मेरा भी कई ऐसी लड़कियों से सामना हुआ है जिन्होंने शादी के नाम से ही तौबा कर ली है। लड़कियां अपनी आजादी को खोना नहीं चाहती। उन्हें इस बात का भी डर होता है कि पता नहीं उनका जीवनसाथी कैसा होगा। उनकी तरक्की में सहायक बनेगा या घर-गृहस्थी और बच्चों में उलझा के रख देगा।
अपनी ही संतान का लेबल लगाने के लिए शादी !?
शादी व्यवस्था का जन्म अपनी ही संतान होने का लेबल लगाने के लिए हुआ था।? क्योंकि पति-पत्नी के संबंधों के बाद होनी वाली संतान को पुरुष अपना खून कहता आया है। यानी उसे इस बात का यकीन होता है कि यह संतान उसका अपना ही खून है। अपने वारिस की प्राप्ति के लिए भी शादी की जाती रही है। जाहिर सी बात है कि पुरुष प्रधान समाज ने अपने कायदे-कानून खुद तय किए। इनमें से कुछ आज तक भी चल रहे है।?
पुरुष मानसिकता में बदलाव लाए बिना मौजूदा शादी व्यवस्था में महिलाओं का विकास संभव नहीं है। चूंकि देखा यही जाता है कि पत्नी को ही तथाकथित त्याग करने के लिए मजबूर किया जाता है। शादी-बच्चे होते ही कॅरियर को तिलांजलि।
कुछ विचार
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मशहूर लेखिका शोभा डे का मानना है कि वर्तमान विवाहों में विवाह वाली बात रही ही नहीं है। अधिकांश लोग 'बस निभाना है...इसलिए शादी का बंधन निभाते हैं। शोभा का मानना है, विवाह ऐसे लोगों के लिए बना ही नहीं है।
ऐसे लोग जो शादी का सच जानना चाहते हैं, जिनके दिमाग में शादी क्यों, कैसे और किसलिए जैसे प्रश्न घुमड़ते रहते हैं, वे जो शादी के उतार-चढ़ाव से रू-ब-रू होना चाहते हैं.... ऐसे सभी लोगों के लिए मशहूर लेखिका शोभा-डे का उपन्यास 'स्पाउस' से रूबरू हुआ जा सकता है।
बुधवार, 20 अप्रैल 2011
चलो डोंगरे की बारात में
एक आम भारतीय यानी रामकृष्ण डोंगरे को भी आपसे रूबरू करवा देते हैं. ये जनाब अखबार नवीस हैं, दोस्तों के अजीज और दोस्तों की बीच 'डोंगरे द डॉन ' के नाम से मशहूर हैं. अखबार से जुड़ने से पहले डोंगरे रेडियो, साहित्य की दुनिया से भी जुड़े रहे हैं. आज भी जुड़े हैं. मध्य प्रदेश के छिंदवाडा जिले के एक छोटे से गाँव तन्सरामाल के बाशिंदे हैं.
इनकी होने वाली जीवन संगिनी भारती ने इंदौर शहर में एक साल तक मशहूर फैशन डिजाइनर रॉकी एस के फैशन स्टूडियो में बतौर फैशन डिजाइनर काम करती रही हैं. रॉकी एस फैशन डिजाइनिंग की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम है. ये फिल्मों के लिए भी ड्रेस डिजाइनिंग का काम करते हैं. तीस मार खां जैसी चर्चित फिल्म की ड्रेस इनके इंदौर स्टूडियो में तैयार हुई है. जो ड्रेस कैटरीना कैफ ने पहनी थी. डोंगरे-भारती का हुनर उन्हें भीड़ से अलग करता है. इसीलिए वो आम होते हुए भी ख़ास हैं.
इस आमो-ख़ास शादी में साहित्य, कला, फिल्म, मीडिया जगत की मशहूर हस्तियाँ शामिल होंगी. इनमें से कुछ नाम कुछ इस प्रकार हैं-
अजय देशमुख (फिल्म निर्देशक, मुंबई), विजय आनंद दुबे (वरिष्ठ रंगकर्मी, फिल्म कलाकार), पुष्पेन्द्र पाल सिंह (एचओडी, माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल), डॉक्टर संजय पाण्डे (रीजनल एड, भास्कर भोपाल), डॉक्टर विजय बहादुर सिंह (वरिष्ठ साहित्यकार भोपाल), बाबा हनुमंत मनगटे (वरिष्ठ साहित्यकार छिंदवाडा), ओम प्रकाश नयन (वरिष्ठ कवि छिंदवाडा), दिनेश गौतम (सहारा समय, नोएडा ). अमिताभ दुबे (जी न्यूज़, नोएडा), हरीश देशमुख (लाइव टीवी, नई दिल्ली), इमरान खान (सहारा समय, नोएडा), प्रो. अरुण गुप्ता (छिंदवाडा)
अमर रामटेके ( कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी नागपुर), डॉक्टर हरीश पराशर रिशु (आकाशवाणी झांसी), गीतांजलि गीत (ज्ञानवाणी इंदौर), राजुरकर राज (आकाशवाणी भोपाल), वल्लभ डोंगरे (साहित्यकार, भोपाल), दीपक आचार्य (अहमदाबाद), नीरज अंधोपिया, आशीष मिश्र (ई टीवी, हैदराबाद), अवधेश तिवारी (वरिष्ठ उद्घोषक, आकाशवाणी छिंदवाडा), सुनीश बक्षी (छिन्दवाडा), धर्मेन्द्र जायसवाल (ब्यूरो चीफ, लोकमत छिंदवाडा), प्रोफ़ेसर अनिता शर्मा (व्याख्याता, राजनीतक शास्त्र, छिंदवाडा), डॉक्टर लक्ष्मीचंद (एचओडी हिंदी विभाग, छिंदवाडा), महेंद्र प्रताप सिंह (स्वतंत्र पत्रकार, ग्वालियर), असद अली (मुंबई), सुदीप कुमार (सिटी रिपोर्टर, पत्रिका भोपाल), डॉक्टर कमल सागरे (आकाशवाणी प्रमुख, छिंदवाडा), धर्मेद्र रघुवंशी (जी३६, रायपुर), दिग्विजय सिंह ( भोपाल) , बीएस डेहरिया (कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी छिंदवाडा) एवं समस्त आकाशवाणी छिन्दवाडा परिवार. विष्णु खरे ( पूर्व एडिटर, नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली), लीलाधर मंडलोई ( नई दिल्ली).
हम अपने ब्लॉग 'उल्टा तीर' के माध्यम से आपको भी दावत दे रहे हैं, आप भी शिरकत कीजिए इस शादी में.
हमारे अन्य ब्लॉग:
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बुधवार, 6 अप्रैल 2011
मैं शादी क्यों करूं...? Its All About Marriage DEBATE
- मैं शादी नहीं करना चाहता क्योंकि...-
- मैं किसी को अपना राजदार नहीं बनाना चाहता
- मैं किसी को अपने निजी फैसलों में दखलअंदाजी की इजाजत नहीं दे सकता
- मैं एक अजनबी को अपने कमरे में अधिकार-पूर्वक बैठा नहीं देख सकता
- मैं डरता हूँ कि वह अजनबी पता नहीं कैसे स्वाभाव का होगा, उससे मेरी बन पाएगी या नहीं
- मैं नहीं जानता मैं किस हद तक समझौते कर पाऊँगा. अगर नहीं बन पाई तो जिंदगी में उथल-पुथल रहेगी. मैं अपनी जिंदगी के वास्तविक मकसद से भटक जाऊँगा. कुछ भी हो सकता है. हो सकता है वह अच्छी हो पर मेरे मकसद में सहयोगी नहीं रही तो.
- मैं क्यों अपनी जिंदगी का नियंत्रण किसी दूसरे के हाथ में सौंप दूं.
- मैं अनचाही जिम्मेदारियाँ निभाने से डरता हूं. पहले एक पत्नी, फिर बच्चे. सब अनचाही जिम्मेदारियां लगती हैं मुझे. और फिर यह मेरा निजी मामला है. कोई जरूरी नहीं कि मैं सारी जिंदगी इनके बोझ तले दबा रहूं. अगर स्वेच्छा से होता तो कोई बात होती.
- मैं अभी अपने करियर में किसी मुकाम पर नहीं पहुँचा हूं. शादी के साथ ही कई तरह की अपेक्षाएँ शुरू हो जाएंगी और उन्हें पूरा कर पाने के लिए मेरे पास पैसे पूरे नहीं पड़ेंगे.
- मैं अपने कमाए हुए पैसे सिर्फ अपने लिए खर्च नहीं करना चाहता. मैं थोड़ा कमाउँ या ज्यादा, उसे पूरे समाज के लिए खर्च करना चाहता हूं.
मेरी बात कोई नहीं समझेगा क्योंकि मैं एक ऐसे समाज में रहता हूँ जहां एक अविवाहित आदमी को लोग अच्छी नजर से नहीं देखते. उसके चरित्र पर शक करते हैं, उसकी क्षमता पर शक करते हैं. मेरे समाज में बिना पत्नी के एक आदमी को अधूरा माना जाता है. मैं इस मई में २८ का हो जाउंगा. घर में सबको एक बहू की जरूरत है, कोई सुनना नहीं चाहता कि मुझे पत्नी की जरूरत है या नहीं. रोज तकरार हो रही है. पर जब भी मैं अपना मन बनाने की कोशिश करता हूं ये सारे सवाल मेरे सामने खड़े हो जाते हैं.
शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011
शामिल हो जाइए, शाही-शादी में! (Debate on MARRIAGE!)
हम अपने ब्लॉग उल्टा तीर पर जिस शादी का चर्चा करने जा रहे हैं वो किसी नेता के लाड़ले या लाड़ली की शादी नहीं है, किसी बहुत बड़े बिसनेस मेन के बेटे या बेटी की शादी नहीं, ना हीं किसी बहुत चर्चित व्यक्ति की ये शादी है. फिर इसमें ऐसा ख़ास क्या है? ख़ास है शादी के लिए इन दोनों का अहसास! और इससे जुड़े तमाम सवाल!
समाज शास्त्र कहता है कि विवाह एक संस्था है. लेकिन हम इसमें थोडा सा बदलाव करेंगे. शादी एक आन्दोलन भी है. शादी एक आन्दोलन भी हो सकता है. उल्टा तीर पर छिंदवाडा मध्य प्रदेश में ३० अप्रैल २०११ को होने वाली एक बेहद आम लेकिन कई मायनों में बहुत खास भारती और रामकृष्ण डोंगरे की शादी के बहाने पूरे महीने हम और आप शादी, इससे जुड़े सवालों, मुद्दों, दिलचस्प वाक्यों से मुखातिब होंगे.आगामी ३० अप्रैल को रामकृष्ण डोंगरे (प्रिंट जर्नलिस्ट, अमर उजाला, दिल्ली) व (फैशन डिजाइनर, भारती) की शादी में हम इस बहस के मंच से आप सभी को शादी में शिरकत करने का भी न्यौता देते हैं.
मग़र जनाब/मोहतरमा, उससे पहले आप शादी को लेकर हमसे जो भी बातें शेयर करना चाहते हैं, वो इस मंच पर जरूर-जरूर करें. तो आइये हम सब चलें डोंगरे और भारती की शादी में...शादी के मुद्दे के तीरों को चलाते हुए.
बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना. ये तो आपने सुना ही होगा. लेकिन शादी में कोई ब्लॉग दीवाना ऐसा पहली बार हो रहा है. इसीलिए आपसे गुजारिश है- उल्टा तीर पर इस पूरी महीने शादी बहस का ही नहीं समझ का भी विषय है.
क्या हमारा भारतीय समाज शादी को लेकर अपनी सोच को बदल पाया है? ऐसे तमाम और सवालों की पड़ताल इस मंच के जरिये शादी जैसे नाज़ुक मसले पर.तो शादी वही, सोच नई!
इस नारे के साथ यहाँ पर हम और आप चर्चा करें, बहस करें शादी पे. शादी से जुड़े हर मसले पर. लिख भेजिए अपने अनुभव, अपने विचार, अपनी बातें!
बदलते हुए हिन्दुस्तान में अब शादी की जिरहें खुलनी ही चाहिए! यकीनन इन जिरहों में छुपी हैं तमाम अनकहीं, अनसुनी, अनदेखी सी, कुछ बुरी सी, कुछ खट्टी-मीठी तो कुछ अच्छी सी गांठें....पर सब खुलेंगीं उल्टा तीर पर इस बार...हम और आप बतियाएंगे...शादी का हर राज!
दोस्तो, बहस शुरू हो चुकी है...
गुरुवार, 17 मार्च 2011
१ अप्रैल २०११ से एक नए विषय [उल्टा तीर]
जैसा कि आप उल्टा तीर से हमेशा ही जुड़े रहे हैं पर कुछ कारणों से उल्टा तीर पर लेखन गतिविधि रुकी हुई है अतः एक बार फिर सुचारू रूप से उल्टा तीर की शुरुआत की जा रही है. जिसमें आपके अमूल्य सुझाव, विचार व आपके मिलने वाले आगामी निरंतर योगदान के बारे में हम जानने के अभिलाषी हैं.
कृपया अपने विचारों, सुझावों व आगामी समय में आपके द्वारा मिलने वाले 'लेखनीय योगदान' के बारे में हमें शीघ्र उत्तरित करें.
*१ अप्रैल २०११ से इक़ नए विषय के साथ उल्टा तीर पर बहस जारी की जायेगी, जिसमें आपका योगदान अपेक्षित है.
कृपया मुझे शीघ्र उत्तरित करें.
सधन्यवाद.
अमित के सागर
मेल करें: ocean4love@gmail.com, ultateer@gmail.com
फोन: +91- 9990 181 944
मंगलवार, 8 मार्च 2011
International Women Day 'N' Poetry of AMIT K SAGAR
शनिवार, 25 सितंबर 2010
लौटी फिर से "फ्रेंड्स विद बेनेफिट्स" [FWB ] बहस- १२
Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस]
यहां फरेब है Friends With Benefits। [बहस 2]
Friends With Benefits की राह [बहस 3]
बिन भावनाओं के सेक्स [ Friends With Benefits ] बहस- ४
ना friends, ना benefits [बहस-५] friends with बेनेफिट्स
फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स - मांग और आपूर्ति का सिद्धांत है ये [बहस-६]
तीन कहानियां: "friends with benefits" रिश्ते के अनुभव- बहस-७
वर्जनाएं टूट रही हैं 'friends with benefits' बहस-८
दोस्ती और दोस्ती का बदलता यथार्थ- friends with benefits- बहस-९
यहां फरेब है {Friends with Benefits} बहस-१०
friends with benefits का अर्थ...? Debate-११
[अमित के सागर]
शुक्रवार, 17 सितंबर 2010
पोएट्री ऑफ़ अमित के सागर
हाल ही में मैंने पोएट्री ऑफ़ अमित के सागर नाम से इक़ रेगुलर ब्लॉग शुरू किया है. कृपया विजिट कर अपना प्यार और मार्गदर्शन दें.विजिट करने के लिए कृपया ब्लॉग के नाम पर क्लिक करें.
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शुभकामनाओं सहित;
[अमित के सागर]
बुधवार, 1 सितंबर 2010
Ganga ke Kareeb: गंगा में प्रवाहित कर दो...............
शुक्रवार, 7 मई 2010
नच की दुनिया (परदे के पीछे की कहानी)
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010
नच की दुनिया (परदे के पीछे की कहानी) & Binny (DID2)
यह पोस्ट मात्र इक़ सूचना भर है! आप सभी से अनुरोध किया जाता; कृपया अपने विचार, पड़ताल, लेख-आलेख, विषय पर (किसी भी विधा में आपकी अभिव्यक्ति) अपने संक्षिप्त परिचय व फोटो के साथ हमें जल्द मेल करें व उल्टा तीर पत्रिका को अधिक से अधिक सार्थक व संग्रहनीय बनाने में अपना अमूल्य सहयोग दें. आपका सहयोग ही उल्टा तीर की शक्ति है. संभवतः उल्टा तीर इस बार वेब पत्रिका के अलावा ~!~नच की दुनिया~!~ (परदे के पीछे की कहानी) को प्रिंट मे भी प्रकाशित हो!
[Amit K Sagar]
रविवार, 14 मार्च 2010
न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी...!!!
गुरुवार, 11 मार्च 2010
क्या जरूरी है शादी से पहले बातचीत?

बुधवार, 10 मार्च 2010
धर्म या जाति
रविवार, 7 मार्च 2010
... ताकि रिश्तों को टूटने से बचा पाएं
लड़का क्या सोचता है, लड़की क्या सोचती है, अपने कॅरियर, लाइफ के बारे में जानना-समझना बेहद जरूरी है। ताकि बाद में कोई गड़बड़ी पैदा न हो। 'लड़की का जॉब करना या न करना' यह भी आज एक बड़ा इश्यू बन चुका है। अब आप इसे किस कानून के जरिए तय नहीं कर सकते ?




















