* उल्टा तीर लेखक/लेखिका अपने लेख-आलेख ['उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ'] पर सीधे पोस्ट के रूप में लिख प्रस्तुत करते रहें. **(चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक, ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिखें ) ***आपके विचार/लेख-आलेख/आंकड़े/कमेंट्स/ सिर्फ़ 'उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ' पर ही होने चाहिए. सधन्यवाद.
**१ अप्रैल २०११ से एक नए विषय (उल्टा तीर शाही शादी 'शादी पर बहस')के साथ उल्टा तीर पर बहस जारी...जिसमें आपका योगदान अपेक्षित है.*[उल्टा तीर के रचनाकार पूरे महीने भर कृपया सिर्फ और सिर्फ जारी [बहस विषय] पर ही अपनी पोस्ट छापें.]*अगर आप उल्टा तीर से लेखक/लेखिका के रूप में जुड़ना चाहते हैं तो हमें मेल करें या फोन करें* ULTA TEER is one of the well-known Hindi debate blogs that raise the issues of our concerns to bring them on the horizon of truth for the betterment of ourselves and country. आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं! *आपका - अमित के सागर E-mail: ocean4love@gmail.com, ultateer@gmail.com, Mob: +91- 9990 181944

रविवार, 1 जनवरी 2012

शुभ हो नववर्ष


नया वर्ष आ गया; वर्ष 2012 आ गया; पुराना वर्ष 2011 चला गया। इस समय समाचारों में लोगों का उत्साह दिखाया जा रहा है। घर के कमरे में बैठे-बैठे हमें यहां उरई में खुशी में फोड़े जा रहे पटाखों का शोर सुनाई दे रहा है। लोगों की खुशी को कम नहीं करना चाहते, हमारे कम करने से होगी भी नहीं।

कई सवाल बहुत पहले से हमारे मन में नये वर्ष के आने पर, लोगों के अति-उत्साह को देखकर उठते थे कि इतनी खुशी, उल्लास किसलिए? पटाखों का फोड़ना किसलिए? रात-रात भर पार्टियों का आयोजन और हजारों-लाखों रुपयों की बर्बादी किसलिए? कहीं इस कारण से तो नहीं कि इस वर्ष हम आतंकवाद की चपेट में नहीं आये? कहीं इस कारण तो नहीं कि हम किसी दुर्घटना के शिकार नहीं हुए? कहीं इस कारण तो नहीं कि हमें पूरे वर्ष सम्पन्नता, सुख मिलता रहा?

इसके बाद भी नववर्ष के आने से यह एहसास हो रहा है कि बुरे दिन वर्ष 2011 के साथ चले गये हैं और नववर्ष अपने साथ बहुत कुछ नया लेकर ही आयेगा। देशवासियों को सुख-समृद्धि-सफलता-सुरक्षा आदि-आदि सब कुछ मिले। संसाधनों की उपलब्धता रहे, आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे।

कामना यह भी है कि इस वर्ष में बच्चियां अजन्मी न रहें; कामना यह भी है कि महिलाओं को खौफ के साये में न जीना पड़े; कामना यह भी है कैरियर के दबाव में हमारे नौनिहालों को मौत को गले लगाने को मजबूर न होना पड़े; कामना यह भी कि कृषि प्रधान देश में किसानों को आत्महत्या करने जैसे कदम न उठाने पड़ें; कामना यह भी कि भ्रष्टाचारियों की कोई नई नस्ल पैदा न होने पाये और पुरानी नस्ल का विकास न होने पाये....कितना-कितना है कामना करने के लिए....नये वर्ष के साथ होने के लिए।

आइये चन्द लम्हों के आयोजन में हजारों-लाखों रुपयों की बर्बादी कर देने के साथ-साथ इस पर भी विचार करें। इस विचार के साथ ही आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनायें...कामना है कि आप सभी को ये वर्ष 2012 सुख-सम्पदा-सुरक्षा-सम्पन्नता-सुकून से भरा मिले।


चित्र गूगल छवियों से साभार


मंगलवार, 26 जुलाई 2011

सन्देश (अमित के सागर)


व्यस्त हूँ दोस्तो.
जल्द लौटूंगा आप सबके बीच :-)

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

डोंगरे की 'शादी पर सीधी बात' (SHADI PAR BAHAS)



रामकृष्ण डोंगरे
'जर्नलिस्ट अमर उजाला'
शादी ... क्यों ?
लोग शादियां क्यों करते हैं? ये तो वे ही जानें, और मैं शादी क्यों कर रहा हूं। यह आपको ३० अप्रैल के बाद पता चल जाएगा। जब आप थोड़ा पसर्नल डोंगरे से रूबरू हो सकेंगे। फिलहाल बहस में हिस्सा लेते हुए हम आपको कुछ सोचना के लिए मजबूर कर रहे हैं।

कई यूथ अपनी लाइफ को डिस्टर्ब नहीं करना चाहते। इसलिए भी अविवाहित रहने का मन बना लेते हैं। यह गल्र्स और ब्वॉयज दोनों पर लागू होता है। फिर सब शादी करके ही कौन-सा तीर मार लेते है। वहीं दूसरा पहलू यह भी है कि ज्यादातर शादीशुदा जोड़े देश की आबादी बढ़ाने में अतिमहत्वपूर्ण सहयोग देना जरूर अपना कत्र्तव्य समझते हैं।

हम शादी क्यों करना चाहते क्योंकि...?
  • शादी व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं.
  • सदियों से चली आ रही शादी की परंपरा को निभाना चाहते हैं.
  • अपने खानदान को चलाने के लिए वंश प्राप्त करना चाहते हैं.
  • या कि सिर्फ शारीरिक सुख, सुरक्षित सेक्स हासिल करने के लिए शादी करना चाहते हैं.
अब सवाल कुछ तीखा ...
  • क्या ज्यादातर शादियां देश की आबादी बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।
शादी ... क्यों और किसलिए? क्या इसलिए कि यह एक व्यवस्था है, जिसका हिस्सा हम सबको बनना होता है? या एक परंपरा है, जिसे हमें निभाना पड़ता है, खानदान चलाने के लिए वंश प्राप्त करने का जरिया है। अगर हम थोड़ा बोल्ड होकर कहें तो क्या इसलिए कि यह शारीरिक सुख, सेक्स हासिल करने का परंपरागत तरीका है। इस बारे में सभी की राय अलग-अलग हो सकती है।

क्या एक व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए शादी की जाए?

तो मुझे नहीं लगता कि हर व्यवस्था का हिस्सा बनना सभी के लिए जरूरी है। और बात जहां तक वंश चलाने के लिए संतान हासिल करने की होती है, तो आज के आधुनिक युवाओं के लिए यह कोई इश्यु नहीं रह गया है। अविवाहित रहने वाले ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं सोचते। इनमें से कुछ लोग बच्चों को गोद ले लेते हैं। बिना शादी के भी आप माता-पिता होने की जिम्मेदारी निभा सकते है।

अब हम बात सेक्स या शारीरिक जरूरत पूरी करने के लिए शादी की करते हैं। ?

तो ज्यादातर युवा इन दिनों शादी से पहले या बाद में सेक्स के लिए शादी की अनिवार्यता को नकारते नजर आ रहे हैं। फिर भी ज्यादातर युवा सुरक्षित सेक्स के लिए शादी करने का ही विकल्प अपनाते हैं। क्योंकि बगैर शादी के सेक्स का रास्ता सभी के लिए उतना आसान नहीं है। बहुत सारे लोग शादी से कतराते हैं। इसका एक कारण यह है कि लड़के किसी अन्य का दायित्व उठाने से बचना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि वे अपनी बीवी के नखरे और डिमांड को पूरा नहीं कर पाएंगे।

उधर, दूसरी तरफ लड़कियों का भी शादी से मोहभंग होता जा रहा है। क्योंकि उनको लगता है कि शादी उनके कॅरियर पर विराम लगा देती है। कई मामलों में यह सच भी साबित हुआ है। मेरा भी कई ऐसी लड़कियों से सामना हुआ है जिन्होंने शादी के नाम से ही तौबा कर ली है। लड़कियां अपनी आजादी को खोना नहीं चाहती। उन्हें इस बात का भी डर होता है कि पता नहीं उनका जीवनसाथी कैसा होगा। उनकी तरक्की में सहायक बनेगा या घर-गृहस्थी और बच्चों में उलझा के रख देगा।

अपनी ही संतान का लेबल लगाने के लिए शादी !?
शादी व्यवस्था का जन्म अपनी ही संतान होने का लेबल लगाने के लिए हुआ था।?  क्योंकि पति-पत्नी के संबंधों के बाद होनी वाली संतान को पुरुष अपना खून कहता आया है। यानी उसे इस बात का यकीन होता है कि यह संतान उसका अपना ही खून है। अपने वारिस की प्राप्ति के लिए भी शादी की जाती रही है। जाहिर सी बात है कि पुरुष प्रधान समाज ने अपने कायदे-कानून खुद तय किए। इनमें से कुछ आज तक भी चल रहे है।?

पुरुष मानसिकता में बदलाव लाए बिना मौजूदा शादी व्यवस्था में महिलाओं का विकास संभव नहीं है। चूंकि देखा यही जाता है कि पत्नी को ही तथाकथित त्याग करने के लिए मजबूर किया जाता है। शादी-बच्चे होते ही कॅरियर को तिलांजलि।
सीधी बात अभी बाकी है... शादी अभी बाकी है  *-*-* डोंगरे की शादी पर सीधी बात... जारी रहेगी...
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कुछ विचार
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मशहूर लेखिका शोभा डे का मानना है कि वर्तमान विवाहों में विवाह वाली बात रही ही नहीं है। अधिकांश लोग 'बस निभाना है...इसलिए शादी का बंधन निभाते हैं। शोभा का मानना है, विवाह ऐसे लोगों के लिए बना ही नहीं है।
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ऐसे लोग जो शादी का सच जानना चाहते हैं, जिनके दिमाग में शादी क्यों, कैसे और किसलिए जैसे प्रश्न घुमड़ते रहते हैं, वे जो शादी के उतार-चढ़ाव से रू-ब-रू होना चाहते हैं.... ऐसे सभी लोगों के लिए मशहूर लेखिका शोभा-डे का उपन्यास 'स्पाउस' से रूबरू हुआ जा सकता है। 
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ब्लॉग: डोंगरे के ७ फेरे ! ई मेल: dongre.trishna@gmail.com

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

चलो डोंगरे की बारात में


इसे दावत नामा ही समझें, आम आदमी की ताकत क्या होती है अन्ना ने साबित कर दिया है. पूरी दुनिया में प्रिंस विलियम (२९ अप्रैल) की शादी का ही चर्चा क्यों हो? तो जनाब अब हम चर्चा करेंगे एक आम भारतीय रामकृष्ण डोंगरे की शादी की. जो आने वाली ३० अप्रैल २०११ को छिंदवाडा (मध्य प्रदेश) में भारती के साथ होगी. डोंगरे दूल्हा बनने जा रहे हैं. हमारे ब्लॉग उल्टा तीर ने उनकी शादी की पल-पल की ख़बरें देने की पहल शुरू की है.

एक आम भारतीय यानी रामकृष्ण डोंगरे को भी आपसे रूबरू करवा देते हैं. ये जनाब अखबार नवीस हैं, दोस्तों के अजीज और दोस्तों की बीच 'डोंगरे द डॉन ' के नाम से मशहूर हैं. अखबार से जुड़ने से पहले डोंगरे रेडियो, साहित्य की दुनिया से भी जुड़े रहे हैं. आज भी जुड़े हैं. मध्य प्रदेश के छिंदवाडा जिले के एक छोटे से गाँव तन्सरामाल के बाशिंदे हैं.

इनकी होने वाली जीवन संगिनी भारती ने इंदौर शहर में एक साल तक मशहूर फैशन डिजाइनर रॉकी एस के फैशन स्टूडियो में बतौर फैशन डिजाइनर काम करती रही हैं. रॉकी एस फैशन डिजाइनिंग की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम है. ये फिल्मों के लिए भी ड्रेस डिजाइनिंग का काम करते हैं. तीस मार खां जैसी चर्चित फिल्म की ड्रेस इनके इंदौर स्टूडियो में तैयार हुई है. जो ड्रेस कैटरीना कैफ ने पहनी थी. डोंगरे-भारती का हुनर उन्हें भीड़ से अलग करता है. इसीलिए वो आम होते हुए भी ख़ास हैं.

इस आमो-ख़ास शादी में साहित्य, कला, फिल्म, मीडिया जगत की मशहूर हस्तियाँ शामिल होंगी. इनमें से कुछ नाम कुछ इस प्रकार हैं-

अजय देशमुख (फिल्म निर्देशक, मुंबई), विजय आनंद दुबे (वरिष्ठ रंगकर्मी, फिल्म कलाकार), पुष्पेन्द्र पाल सिंह (एचओडी, माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल), डॉक्टर संजय पाण्डे (रीजनल एड, भास्कर भोपाल), डॉक्टर विजय बहादुर सिंह (वरिष्ठ साहित्यकार भोपाल), बाबा हनुमंत मनगटे (वरिष्ठ साहित्यकार छिंदवाडा), ओम प्रकाश नयन (वरिष्ठ कवि छिंदवाडा), दिनेश गौतम (सहारा समय, नोएडा ). अमिताभ दुबे (जी न्यूज़, नोएडा), हरीश देशमुख (लाइव टीवी, नई दिल्ली), इमरान खान (सहारा समय, नोएडा),  प्रो. अरुण गुप्ता (छिंदवाडा)

अमर रामटेके  ( कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी नागपुर),  डॉक्टर हरीश पराशर रिशु (आकाशवाणी झांसी), गीतांजलि गीत (ज्ञानवाणी  इंदौर),  राजुरकर राज (आकाशवाणी भोपाल), वल्लभ डोंगरे (साहित्यकार,  भोपाल), दीपक आचार्य (अहमदाबाद), नीरज अंधोपिया, आशीष मिश्र (ई टीवी, हैदराबाद), अवधेश तिवारी (वरिष्ठ उद्घोषक, आकाशवाणी छिंदवाडा), सुनीश बक्षी (छिन्दवाडा), धर्मेन्द्र जायसवाल (ब्यूरो चीफ,  लोकमत छिंदवाडा),  प्रोफ़ेसर अनिता शर्मा (व्याख्याता, राजनीतक शास्त्र, छिंदवाडा),  डॉक्टर लक्ष्मीचंद (एचओडी हिंदी विभाग, छिंदवाडा),  महेंद्र प्रताप सिंह (स्वतंत्र  पत्रकार, ग्वालियर),  असद अली (मुंबई), सुदीप कुमार (सिटी रिपोर्टर, पत्रिका भोपाल), डॉक्टर कमल सागरे (आकाशवाणी प्रमुख, छिंदवाडा), धर्मेद्र रघुवंशी (जी३६, रायपुर), दिग्विजय सिंह ( भोपाल) , बीएस डेहरिया (कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी छिंदवाडा) एवं समस्त आकाशवाणी छिन्दवाडा परिवार. विष्णु खरे ( पूर्व एडिटर, नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली), लीलाधर मंडलोई ( नई दिल्ली).

हम अपने ब्लॉग 'उल्टा तीर' के माध्यम से आपको भी दावत दे रहे हैं, आप भी शिरकत कीजिए इस शादी में.
हमारे अन्य ब्लॉग:
अगली पोस्ट में हम आपके सामने लाएंगें <<<<<<... डोंगरे की <<<<< (शादी पर सीधी बात) <<<<< जिसके माध्यम से <<<<<वे हमारी मौजूदा बहस में <<<<शामिल होने जा रहे हैं! <<<<< आप भी आ रहे हैं..) ना .
*-*
उल्टा तीर टीम

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

मैं शादी क्यों करूं...? Its All About Marriage DEBATE


हर रोज़ बदलते भारत में शादी को लेके हमारे भारतीय समाज की सोच बदली हो या न बदली हो, यह एक अनउत्तरित सवाल है पर बहुतियात में देखने को मिलता है कि 'शादी के- दूल्हे-दुल्हनों' के मन में आज जरूर कई नए सवाल पैदा हो गए हैं! क्या है आखरी इन सवालों के पीछे? क्यों हैं ये सवाल! और क्या हैं इनके जवाब! ये सब पड़ताल ही करने को 'उल्टा तीर' ने 'शादी पर बहस' शुरी की है. इसी कड़ी में आज पेश है एक अनाम (पुरुष) शख्स की सच्ची पाती! 

मैं शादी क्यों करूं...?
एक अनाम शख्स की पाती : एक सवाल मासूम-सा
  • मैं शादी नहीं करना चाहता क्योंकि...-
  • मैं किसी को अपना राजदार नहीं बनाना चाहता
  • मैं किसी को अपने निजी फैसलों में दखलअंदाजी की इजाजत नहीं दे सकता
  • मैं एक अजनबी को अपने कमरे में अधिकार-पूर्वक बैठा नहीं देख सकता
  • मैं डरता हूँ कि वह अजनबी पता नहीं कैसे स्वाभाव का होगा, उससे मेरी बन पाएगी या नहीं
  • मैं नहीं जानता मैं किस हद तक समझौते कर पाऊँगा. अगर नहीं बन पाई तो जिंदगी में उथल-पुथल रहेगी. मैं अपनी जिंदगी के वास्तविक मकसद से भटक जाऊँगा. कुछ भी हो सकता है. हो सकता है वह अच्छी हो पर मेरे मकसद में सहयोगी नहीं रही तो. 
  • मैं क्यों अपनी जिंदगी का नियंत्रण किसी दूसरे के हाथ में सौंप दूं.
  • मैं अनचाही जिम्मेदारियाँ निभाने से डरता हूं. पहले एक पत्नी, फिर बच्चे. सब अनचाही जिम्मेदारियां लगती हैं मुझे. और फिर यह मेरा निजी मामला है. कोई जरूरी नहीं कि मैं सारी जिंदगी इनके बोझ तले दबा रहूं. अगर स्वेच्छा से होता तो कोई बात होती.
  • मैं अभी अपने करियर में किसी मुकाम पर नहीं पहुँचा हूं. शादी के साथ ही कई तरह की अपेक्षाएँ शुरू हो जाएंगी और उन्हें पूरा कर पाने के लिए मेरे पास पैसे पूरे नहीं पड़ेंगे.
  • मैं अपने कमाए हुए पैसे सिर्फ अपने लिए खर्च नहीं करना चाहता. मैं थोड़ा कमाउँ या ज्यादा, उसे पूरे समाज के लिए खर्च करना चाहता हूं.
मैं जरूरी नहीं समझता कि हर कोई शादी करे ही. इतने सारे लोग शादी-शुदा हैं, कुछ लोग कुवांरे रह जाएंगे तो समाज में डाइवर्सिटी ही बढ़ेगी. शादी करके ही लोग कौन सा तीर मार लेते हैं. मैंने कई कपल देखे हैं जो बेमेल हैं, जो सिर्फ एक दूसरे को सहते हैं, पर मजबूरी में निभाए चले जाते हैं. 
मेरी बात कोई नहीं समझेगा क्योंकि मैं एक ऐसे समाज में रहता हूँ जहां एक अविवाहित आदमी को लोग अच्छी नजर से नहीं देखते. उसके चरित्र पर शक करते हैं, उसकी क्षमता पर शक करते हैं. मेरे समाज में बिना पत्नी के एक आदमी को अधूरा माना जाता है. मैं इस मई में २८ का हो जाउंगा. घर में सबको एक बहू की जरूरत है, कोई सुनना नहीं चाहता कि मुझे पत्नी की जरूरत है या नहीं. रोज तकरार हो रही है. पर जब भी मैं अपना मन बनाने की कोशिश करता हूं ये सारे सवाल मेरे सामने खड़े हो जाते हैं. 
क्या आप कोई मेरे इन शंका, इन सवालों का निवारण कर सकते हैं. मैं आभारी रहूंगा.
 (एक अनाम शख्स की सच्ची पाती)
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(शादी से पहले सभी लोग कुछ इसी तरह की स्थिति से गुजरते हैं  शायद। यह शख्स कौन है, हम नहीं जानते। हमने आप सबके सामने इन सवालों को लाकर जवाब जानने की पहल ही की है।)
'उल्टा तीर'
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"एक चिट्ठी देश के नाम" (हास्य-वयंग्य) ***बहस के पूरक प्रश्न: समाधान मिलके खोजे **विश्व हिन्दी दिवस पर बहस व दिनकर पत्रिका १५ अगस्त 8th march अखबार आओ आतंकवाद से लड़ें आओ समाधान खोजें आतंकवाद आतंकवाद को मिटायें.. आपका मत आम चुनाव. मुद्दे इक़ चिट्ठी देश के नाम इन्साफ इस बार बहस नही उल्टा तीर उल्टा तीर की वापसी एक चिट्ठी देश के नाम एक विचार.... कविता कानून घरेलू हिंसा घरेलू हिंसा के कारण चुनाव चुनावी रणनीती ज़ख्म ताजा रखो मौत के मंजरों के जनसत्ता जागरूरकता जिन्दगी या मौत? तकनीकी तबाही दशहरा धर्म संगठनों का ज़हर नेता पत्नी पीड़ित पत्रिकारिता पुरुष प्रासंगिकता प्रियंका की चिट्ठी फ्रेंडस विद बेनेफिट्स बहस बुजुर्गों की दिशा व दशा ब्लोगर्स मसले और कानून मानसिकता मुंबई का दर्दनाक आतंकी हमला युवा राम रावण रिश्ता व्यापार शादी शादी से पहले श्रंद्धांजलि श्री प्रभाष जोशी संस्कृति समलैंगिक साक्षरता सुमन लोकसंघर्ष सोनी हसोणी की चिट्ठी amit k sagar arrange marriage baby tube before marriage bharti Binny Binny Sharma boy chhindwada dance artist dating debate debate on marriage DGP dharm ya jaati Domestic Violence Debate-2- dongre ke 7 fere festival Friends With Benefits friendship FWB ghazal girls http://poetryofamitksagar.blogspot.com/ my poems indian marriage law life or death love marriage mahila aarakshan man marriage marriage in india my birth day new blog poetry of amit k sagar police reality reality of dance shows reasons of domestic violence returning of ULTATEER rocky's fashion studio ruchika girhotra case rules sex SHADI PAR BAHAS shadi par sawal shobha dey society spouce stories sunita sharma tenis thoughts tips truth behind the screen ulta teer ultateer village why should I marry? main shadi kyon karun women

[बहस जारी है...]

१. नारीवाद २. समलैंगिकता ३. क़ानून (LAW) ४. आज़ादी बड़ी बहस है? (FREEDOM) ५. हिन्दी भाषा (HINDI) ६. धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद . बहस नहीं विचार कीजिये "आतंकवाद मिटाएँ " . आम चुनाव और राजनीति (ELECTION & POLITICS) ९. एक चिट्ठी देश के नाम १०. फ्रेंड्स विद बेनेफिट्स (FRIENDS WITH BENEFITS) ११. घरेलू हिंसा (DOMESTIC VIOLENCE) १२. ...क्या जरूरी है शादी से पहले? १३. उल्टा तीर शाही शादी (शादी पर बहस- Debate on Marriage)