* उल्टा तीर लेखक/लेखिका अपने लेख-आलेख ['उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ'] पर सीधे पोस्ट के रूप में लिख प्रस्तुत करते रहें. **(चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक, ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिखें ) ***आपके विचार/लेख-आलेख/आंकड़े/कमेंट्स/ सिर्फ़ 'उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ' पर ही होने चाहिए. सधन्यवाद.
**१ अप्रैल २०११ से एक नए विषय (उल्टा तीर शाही शादी 'शादी पर बहस')के साथ उल्टा तीर पर बहस जारी...जिसमें आपका योगदान अपेक्षित है.*[उल्टा तीर के रचनाकार पूरे महीने भर कृपया सिर्फ और सिर्फ जारी [बहस विषय] पर ही अपनी पोस्ट छापें.]*अगर आप उल्टा तीर से लेखक/लेखिका के रूप में जुड़ना चाहते हैं तो हमें मेल करें या फोन करें* ULTA TEER is one of the well-known Hindi debate blogs that raise the issues of our concerns to bring them on the horizon of truth for the betterment of ourselves and country. आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं! *आपका - अमित के सागर E-mail: ocean4love@gmail.com, ultateer@gmail.com, Mob: +91- 9990 181944

मंगलवार, 15 सितंबर 2009

"स्वतंत्रता के छ: दशक- क्या खोया क्या पाया?" एक चिट्ठी देश के नाम

वर्ष से जादा की स्वतन्त्रता में हमने क्या खोया क्या पाया, इस तरह के तमाम सवाल हैं जो हिन्दुस्तानियों के ज़ेहन में अक्सर द्वंद करते होंगेइन सबका एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्यों हम इतने वर्षों में भी आज तक इन तमाम सवालों को उत्तरित नहीं कर सके! तरक्की के तमाम आयामों को पार करने के बाद भी आज हम बहुत से मामलों में इतने पराधीन हैं कि मुंह ताकने तक की स्तिथि जाती है! क्यों? इसी तरह के तमाम सवालों से अटी यह "एक चिट्ठी देश के नाम" दिल्ली से देश और समाज के जागरूक युवा [राजीव तनेजा'] ने [उल्टा तीर] को भेजी हैहम-आप सभी मिलकर इस चिट्ठी के कई अहम् सवालों के जवाब तलाशेंगे और अमल करेंगे, ऐसा विश्वास राजीव तनेजा जी का ही नहीं हम सबका होना चाहिए! प्रस्तुतु है "एक चिट्ठी देश के नाम" -

कहने
को तो आज साठ साल से ज़्यादा हो चुके हैं हमें पराधीनता की बेड़ियाँ तोड़ आज़ाद हुए, लेकिन क्या आज भी हम सही मायने में आज़ाद हैं? मेरे ख्याल से नहीं। बेशक!...हमने छोटे से लेकर बड़े तक...हर क्षेत्र में खूब तरक्की की है लेकिन क्यों आज भी हम इटैलियन पिज़्ज़ा खाने को तथा सिंगापुर, मलेशिया, बैंकाक तथा दुबई और मॉरिशस में छुट्टियाँ मनाने को उतावले रहते हैं?

* संचार क्रांति की बदौलत हमारे देश में मोबाईल धारकों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढती जा रही है लेकिन मोबाईल सैट अभी भी क्यों बाहरले देशों से ही बन कर आते हैं?

* आज सैंकड़ों देसी चैनल हमारे मनोरंजन के लिए उपलब्ध हैं लेकिन उनकी ब्राडकास्टिंग दूसरे देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए उपग्रहों द्वारा ही क्यों होती है?

* ये सच है कि हमारे कल-कारखानों में एक से एक उम्दा से उम्दा आईटम तैयार होती है लेकिन फिर भी हम खिलौनों से लेकर कपड़े तक और प्लाईबोर्ड से लेकर रैडीमेड दरवाज़ों तक हर सामान को चीन से आयात कर गर्व तथा खुशी क्यों महसूस करते हैँ?

* क्यों आज हम में से बहुत से लोग हिन्दी जानने के बावजूद अँग्रेज़ी में बात करना पसन्द करते हैँ?

* हिन्दी के राष्ट्रीय भाषा होने के बावजूद क्यों हम अँग्रेज़ी के गुलाम बने बैठे हैँ?

* आज हमारे देश का आम आदमी अपने देश के लिए काम करने के बजाय क्यों बाहरले देशों में बस अपना भविष्य उज्जवल करना चाहता है?

* आज दुनिया भर के होनहार लोगों के होते हुए भी हमें आधुनिक तकनीक के लिए बाहरले देशों का मुँह ताकना पड़ता है तो क्यों?

* आज हमसे हमारी ही संसद में सवाल पूछने के नाम पे पैसा मांगा जाता है तो क्यों?

* क्यों खनिज पदार्थों के अंबार पे बैठे होने के बावजूद हमें बिजली उत्पादन के लिए यूरेनियम से लेकर तकनीक तक के लिए अमेरिका सहित तमाम देशों का पिच्छलग्गू बनना पड़ता है?

* आज अपनी मर्ज़ी से हम अपना नेता अपनी सरकार चुन सकते हैँ लेकिन फिर भी किसी वोटर को चन्द रुपयों और दारू के बदले बिकते देखना पड़ता है तो क्यों?
लेखक का ब्लॉग: हँसते रहो
*-*-*

आइये हम सब मिलकर सवालों की जंजीरों से जकड़े हिन्दुस्तान को मुक्त करें!
अपनी राय जरूर लिखें, हो सकता है आपकी राय ही किसी बड़े सवाल का हल हो!
[उल्टा तीर]

6 टिप्‍पणियां:

  1. सभी प्रश्न सोचने लायक हैं !!!

    इन्हें अगर गौर किया जाये और समाधान की और सोचा जाये तो बहुत सी समस्याए हल हो सकती हैं !!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. अमित जी
    सादर वन्दे!
    आपके सवालों का बस एक ही जबाब है,
    इस देश के नौजवानों का देश प्रेम, और यकीं मानिये जिस दिन वास्तविक देश प्रेम जागेगा भारत में एक और क्रांति होगी और वो बिनाश की नहीं बल्कि बदलाव की क्रांति होगी, लेकिन पहल करने वाला कोई चंद्रशेखर आजाद या भगत सिंह तो पैदा हो वो कौन ..............................हम नौजवानों को यही सोचना है, बाकी सारी सोंचे निरर्थक है क्योंकि यह चंद्रशेखर आजाद या भगत सिंह का देश नहीं है ये नेहरू जैसे सौदेबाज का देश बनकर रह गया है जिसपर आज तक यही परिवार राज कर रहा है.
    रत्नेश त्रिपाठी

    उत्तर देंहटाएं
  3. सादर वन्दे त्रिपाठी जी,
    सबसे पहले आपकी अमूल्य राय के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
    मैं तो बस यही कहना चाहूंगा कि चन्द्रशेखर या फिर भगत सिंह भी अब हम ही में से किसी को बनना पडेगा...
    सोचने से जादा अब करने की बारी होनी चाहिए और फिर यकीन रखिये कि जो किया जाएगा...वह होकर ही रहेगा! एक्ट पर यकीन करने का समय आ गया है बंधू!
    --
    अश्विन जी आपका बहुत-बहतु आभार आपने अपनी राय दी.
    --

    उत्तर देंहटाएं
  4. पिछले दिनों से सभी चिट्ठियों को पढ रहा हूं...राजीव भाई ने बहुत ही सामयिक और सार्थक प्रश्न उठाये हैं....मुझे दुख है कि मैं ...कुछ निजि व्यस्तताओं के कारण आपके इस अभियान में भागीदारी नहीं निभा पाया...क्या अब भेज सकता हूं...यदि हां तो ...मुझे आपके इशारे का इंतज़ार रहेगा...

    उत्तर देंहटाएं
  5. अमित जी आपको देश के नाम एक चिठ्ठी के लिए बधाई इसमें आपने जितनी भी चिठ्ठी ली सब विशष महत्व लिए हुए है
    सवाल काफी ज्यादा है और जवाब शायद एक की यदि हम सब देश प्रेमी हो तो इन सब सवालो का जवाब सकारात्मक होगा

    उत्तर देंहटाएं
  6. aapki rachanaa tareef ke kabil hai. maine bhi is pattern par samay darpan blog par likha tha.

    उत्तर देंहटाएं

आप सभी लोगों का बहुत-बहुत शुक्रिया जो आप अपने कीमती वक़्त से कुछ समय निकालकर समाज व देश के विषयों पर अपनी अमूल राय दे रहे हैं. इस यकीन के साथ कि आपका बोलना/आपका लिखना/आपकी सहभागिता/आपका संघर्ष एक न एक दिन सार्थक होगा. ऐसी ही उम्मीद मुझे है.
--
बने रहिये हर अभियान के साथ- सीधे तौर से न सही मगर जुडी है आपसे ही हर एक बात.
--
आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं!
--
आभार
[उल्टा तीर] के लिए
[अमित के सागर]

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"एक चिट्ठी देश के नाम" (हास्य-वयंग्य) ***बहस के पूरक प्रश्न: समाधान मिलके खोजे **विश्व हिन्दी दिवस पर बहस व दिनकर पत्रिका १५ अगस्त 8th march अखबार आओ आतंकवाद से लड़ें आओ समाधान खोजें आतंकवाद आतंकवाद को मिटायें.. आपका मत आम चुनाव. मुद्दे इक़ चिट्ठी देश के नाम इन्साफ इस बार बहस नही उल्टा तीर उल्टा तीर की वापसी एक चिट्ठी देश के नाम एक विचार.... कविता कानून घरेलू हिंसा घरेलू हिंसा के कारण चुनाव चुनावी रणनीती ज़ख्म ताजा रखो मौत के मंजरों के जनसत्ता जागरूरकता जिन्दगी या मौत? तकनीकी तबाही दशहरा धर्म संगठनों का ज़हर नेता पत्नी पीड़ित पत्रिकारिता पुरुष प्रासंगिकता प्रियंका की चिट्ठी फ्रेंडस विद बेनेफिट्स बहस बुजुर्गों की दिशा व दशा ब्लोगर्स मसले और कानून मानसिकता मुंबई का दर्दनाक आतंकी हमला युवा राम रावण रिश्ता व्यापार शादी शादी से पहले श्रंद्धांजलि श्री प्रभाष जोशी संस्कृति समलैंगिक साक्षरता सुमन लोकसंघर्ष सोनी हसोणी की चिट्ठी amit k sagar arrange marriage baby tube before marriage bharti Binny Binny Sharma boy chhindwada dance artist dating debate debate on marriage DGP dharm ya jaati Domestic Violence Debate-2- dongre ke 7 fere festival Friends With Benefits friendship FWB ghazal girls http://poetryofamitksagar.blogspot.com/ my poems indian marriage law life or death love marriage mahila aarakshan man marriage marriage in india my birth day new blog poetry of amit k sagar police reality reality of dance shows reasons of domestic violence returning of ULTATEER rocky's fashion studio ruchika girhotra case rules sex SHADI PAR BAHAS shadi par sawal shobha dey society spouce stories sunita sharma tenis thoughts tips truth behind the screen ulta teer ultateer village why should I marry? main shadi kyon karun women

[बहस जारी है...]

१. नारीवाद २. समलैंगिकता ३. क़ानून (LAW) ४. आज़ादी बड़ी बहस है? (FREEDOM) ५. हिन्दी भाषा (HINDI) ६. धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद . बहस नहीं विचार कीजिये "आतंकवाद मिटाएँ " . आम चुनाव और राजनीति (ELECTION & POLITICS) ९. एक चिट्ठी देश के नाम १०. फ्रेंड्स विद बेनेफिट्स (FRIENDS WITH BENEFITS) ११. घरेलू हिंसा (DOMESTIC VIOLENCE) १२. ...क्या जरूरी है शादी से पहले? १३. उल्टा तीर शाही शादी (शादी पर बहस- Debate on Marriage)