मानसिकता बदलने की जरूरत है भारतीय कानूनमें 498 ए आई पी सी में दंड की व्यवस्था की गई है किंतु सरकार ने पुरुषवादी मानसिकता के तहत एकनया कानून घरेलु हिंसा अधिनियम बनाया है जिसका सीधा-सीधा मतलब है पुरुषों द्वारा की गई घरेलू हिंसा से बचावकरना है इस कानून के प्राविधान पुरुषों को ही संरक्षण देते हैं.
समाज व्यवस्था में स्त्रियों को पुरुषों के ऊपर आर्थिक रूप से निर्भर रहना पड़ता है जिसके कारण घरेलू हिंसा का विरोधभी नही हो पाता है आज के समाज में बहुसंख्यक स्त्रियों की हत्या घरों में कर दी जाती है और अधिकांश मामलों मेंसक्षम कानून व पुरुषवादी मानसिकता के कारण कोई कार्यवाही नही हो पाती है । स्त्रियों को संरक्षण के लिए जितने भीकानून बने हैं वह कहीं न कहीं स्त्रियों को ही प्रताडित करते हैं , जब तक 50% आबादी वाली स्त्री जाति को आर्थिक स्तरपर सुदृण नही किया जाता है तबतक लचर कानूनों से उनका भला नही होने वाला है ।
किसी भी देश का तभी भला हो सकता है जब उस देश की बहुसंख्यक स्त्रियाँ भी आर्थिक रूप से सुदृण होहमारे देश को बहुत सारे प्रान्तों में स्त्रियाँ 18-18 घंटे तक कार्य करती हैं और पुरूष कच्ची या पक्की दारूपिए हुए पड़े रहते हैं उसके बाद भी वो कामचोर पुरूष पुरुषवादी मानसिकता के तहत उन मेहनतकशस्त्रियों की पिटाई करता रहता है । घरेलु हिंसा से तभी निपटा जा सकता है जब सामाजिक रूप से स्त्रियाँमजबूत हों । ।
यह पोस्ट उल्टा तीर पर चल रही बहस घरेलू हिंसा के लिए लिखी गई है और इसका शीर्षक यह इसलिए रखा गया है कीमुझे इन्टरनेट पर पत्नी पीड़ित ब्लागरों की यूनियन बनाने की बात की पोस्ट दिखाई दी थी इसलिए पत्नी पीड़ितचिट्ठाकारों से क्षमा मांग ली गई है ।
[सुमन]










आर्थिक रूप से सुदृढ़ होना ही चाहिए।
प्रत्युत्तर देंहटाएंक्या आपने कभी सोचा है की आखिर ये महिला क्यों
प्रत्युत्तर देंहटाएंपिटती है क्यों नहो इसका प्रतिकार करती क्युकी देश मई आज भी नारी देश की राजधानी मे वेश्यावर्ती कानून अपराध होते हुए भी जारी है तब दूर दराज के गाँव और कस्बो मे रहने वाली ओरतो के हक के बात करना और ये कहना की ये कानून है फला कानून है इनका कोई मतलब नहीं आपसे एक सवाल पूछता हूँ की क्या उस ओरत को वो पुरुष पत्नी रूप मे दुबारा उसे स्वीकार करेगा जब वो उसको पुलिश मे सिकायत कर बंद करवा दे
जय श्री राम
sriman karmowala ji,
प्रत्युत्तर देंहटाएंdeh vyapar mein bhaduva purush hi hota hai aur poora deh vyapar purushon dvara hi sanchalit kiya jata hai striyon ko majboor kar pratadit kar yah kary hota hai aap ko styriyon ko pitane ka adhikaar kis sabhy samaj ne de diya hai striyaan pitti rahein aur ufh bhi na karein agar striyaan aarthik roop se majboot hain unko pitane ki koi himmat kar sakta hai gharelu hinsa ka mukhy karan striyon ka svavlambi hona purush vaadi mansikta k karan tamaam ulte sidhe savaal uthte rehte hain jiska koi matlab nahi hota hai isliye aap se vinamr anurodh hai ki aap apni patni ko pair ki jooti na samjhein sar ka taaj bana kar rakhein
sadar
suman
isse mahila shakti me ek nai jagrati aayegi
प्रत्युत्तर देंहटाएंamit ji
प्रत्युत्तर देंहटाएंyou done fantastic job for woman
i hope so you r succes in and plese don't stop till reach ur goal
mai janti hu
प्रत्युत्तर देंहटाएंtum mere liye jo pazeb laye ho
vah mere pairon me sajne ke liye nahi
meri choukasi ke liye hai.
Mere hathon ki chudiyan meri har aahat ki khabar tum tak pahucha deti hai
Taki tum meri har gatividhi par niyantran rakh sako
सामाजिक रूप से स्त्रियों का मजबूत होना बेहद जरूरी है ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंजब तक ५० प्रतिशत स्त्री जाति को आर्थिक रूप से सुद्दढ़ नहीं किया जाता है
प्रत्युत्तर देंहटाएंतब तक लचर कानूनों से उनका भला होने वाला नहीं--
लेख में ऐसे ही सुझाव आने चाहिए।
समस्या तो सभी जानते हैं
बहस इस बात पर होनी चाहिए
कि हम
समस्या का हल क्या निकाल सकते हैं।
घरेलू हिंसा से बचाव व जागरूकता के लिए पढिये मरे ब्लाग पर आखिर कब तक सहूगी.... अन्तिम भाग
प्रत्युत्तर देंहटाएंEmotin's http://swastikachunmun.blogspot.com
Bahut accha lage raho
प्रत्युत्तर देंहटाएं... समय के साथ बदलाव आवश्यक हो गया अन्यथा इस तरह की घरेलू हिंसा होते रहेगी !!!!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसामाजिक रूप से स्त्रियों का मजबूत होना बेहद जरूरी है ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंSAB APNI APNI KISMAT KA PAYA HAI KON KISKO AAJ KAL KI AURAT BHI BAHUT CHODARI HO GAYI HAI
प्रत्युत्तर देंहटाएंkanoon banakar ham yah sochte hain ki hamara kartavya khatm ho gaya ,par kya iska durupyog nahi ho raha hai? jo puroosh is case me fasaye jaa rahe hain kya sach me unka ektarfa hath hai .
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