* उल्टा तीर लेखक/लेखिका अपने लेख-आलेख ['उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ'] पर सीधे पोस्ट के रूप में लिख प्रस्तुत करते रहें. **(चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक, ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिखें ) ***आपके विचार/लेख-आलेख/आंकड़े/कमेंट्स/ सिर्फ़ 'उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ' पर ही होने चाहिए. धन्यवाद.
**१ अप्रैल २०११ से एक नए विषय (उल्टा तीर शाही शादी 'शादी पर बहस')के साथ उल्टा तीर पर बहस जारी...जिसमें आपका योगदान अपेक्षित है.*[उल्टा तीर के रचनाकार पूरे महीने भर कृपया सिर्फ और सिर्फ जारी [बहस विषय] पर ही अपनी पोस्ट छापें.]*अगर आप उल्टा तीर से लेखक/लेखिका के रूप में जुड़ना चाहते हैं तो हमें मेल करें या फोन करें* ULTA TEER is one of the well-known Hindi debate blogs that raise the issues of our concerns to bring them on the horizon of truth for the betterment of ourselves and country. आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं! *आपका - अमित के सागर | ई-मेल: ultateer@gmail.com

शनिवार, 26 जुलाई 2008

सवाल क़ानून की प्रासंगिकता का ?

सवाल क़ानून की प्रासंगिकता का ?
भारत में क़ानून को लेकर आम नागरिकों में जागरूकता की कमी रही है। ये निराशा तब और भी बढ़ जाती है जब हमारे देश में शिक्षित वर्ग भी कानून के विषय में एक तरह से निरक्षर ही नज़र आता है। सम्प्रति ये ज़रूरत है कि देश में कानून के प्रति अब समाज ऐसे मामलों से भरा पड़ा है जहाँ क़ानून में जागरूकता की कमी के चलते पढ़े लिखे लोग भी कानून के पेशेवरों के हाथों की कठपुतली बने है लोगो को सजग और जागरूक किया जाए। ऐसा कतई नही है कि क़ानून की पेचीदगियों का शिकार केवल अशिक्षित वर्ग ही बनता है

दरअसल, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि हमारे देश में कई ऐसे क़ानून है जो समय के साथ अपनी प्रासंगिकता को खो चुके है। बावजूद इसके ये आज भी बदस्तूर क़ायम है। समय में बदलाव के साथ क़ानून में भी बदलाव किए जाने चाहिए

उन क़ानूनों को सिरे से रद्द कर दिया जाए जो आज के परिप्रेक्ष्य में सार्थक नही है। लेकिन होता क्या है नए नए क़ानून बनते है, क़ानून की धाराएं बढ़ जाती है, किताबे मोटी हो जाती है। और घूम फिर के क़ानून फिर लोगो के बीच में एक अभूझ पहेली बन जाता है

क़ानून जिनके लिए है , जो क़ानून से प्रभावित होते है। उनमे मैं आप हम सभी आते है। तब क्या

ये ज़रूरी नही हो जाता कि क़ानून की भाषा इसके क़ायदे हमें उस रूप में उपलब्ध हो जिसे हम सब सरलता से समझ सके।
उल्टा तीर पर कानून की प्रासंगिकता को लेकर शुरू की गई बहस इसलिए भी प्रासंगिक लगती है। सवाल ये भी है क़ानून की प्रासंगिगता को चुनौती देगा कौन! निसंदेह ये भी हम सभी को समाज को मिलकर तय करना होगा। सवाल हमें ही उठाने होंगे, इसलिए भी क्योंकि बहस अभी बाकी है मेरे दोस्त !!!

अपनी राय प्रतिक्रियाएँ भेजते रहिये क्योंकि बहस अभी जारी है मेरे दोस्त!!!
बहस में भाग लेने वाले सभी प्रिय पाठकों, सहभागियों को मेरा शुक्रिया व् आभार;
खुल कर भाग लीजिये। निसंकोच अपनी बात कीजिये.
आपकी राय अमूल्य है! आपकी चीख़ तर्क है! न्याय शून्य है! हम सबको बेहतर समाज बेहतर जिंदगी पुन्य तुल्य है!
शेष हैं आख़री दिन, "उल्टा तीर" के मंच पर दिल खोलकर शिरकत कीजिये (जश्ने-आजादी-०८) में अपने अमूल्य विचारों के साथ; जश्ने-आजादी के पत्रिका में;
साथ में अपनी तस्वीर व् संक्षिप्त परिचय जरुर भेजें।

सोमवार, 14 जुलाई 2008

आमंत्रण (जश्ने आज़ादी २००८)

आमंत्रण
गस्त का महीना हम भारतीयों के लिए एक विशेष अर्थ रखता हैहम दुनिया के किसी भी कोने में हों, किसी भी मुल्क में रहते हों, १५ अगस्त के जश्न को हम अपने अपने अंदाज़ में मानते हैं दरअसल, आज़ादी भारतीयम की भावना हम सब को एकता के सूत्र में पिरोती हैउल्टा तीर इन भावों को मिलकर, मुल्कों- देश की दीवारों से परे जाकर मना रहा है

आज़ादी की सालगिरह हम सभी के लिए एक मौका हैहिन्दी ब्लॉग्गिंग के मंच पर एक पहल हैजहाँ हम सब जमा होंगेअपने विचार और अभिवक्ति के साथ जश्ने आज़ादी को मनाने के लिएजश्ने आज़ादी के इस महा कुम्भ में आप सभी का स्वागत है। अपने विचार लेख आलेख कवितायें आदि २५ जुलाई २००८ तक अपनी तस्वीर व् अपने संक्षिप्त परिचय के साथ हमें मेल करिए
आपके अमूल्य योगदान की प्रतीक्षा में
उल्टा तीर

मंगलवार, 8 जुलाई 2008

बहस से परहेज़ क्यों ?

बहस से परहेज़ क्यों ?

"
उल्टा तीर" की हमेशा यही कोशिश रही है कि इस मंच पर हम सभी मिलकर उन मुद्दों पर खुल कर बहस करें, जो लंबे अर्से से हमें और हमारे समाज को उद्वेलित करते रहे है। हमारी कोशिश अब धीरे धीरे ही सही रंग ला रही है। फिर मुझे ये कहने में कोई झिझक नही कि समाज आज भी ऐसे किसी भी मुद्दे पर बोलने में संकोच करता है। जो कि उसे सबसे ज्यादा परेशान करता है। अब कानून की बहस को उदाहरण के रूप में ले लीजिये, कानून से हम सबका सीधा और प्रत्यक्ष वास्ता है। बावजूद इसके इस मुद्दे पर समाज में बोलने वालों का लगता है टोटा पड़ गया है । उल्टा तीर पर कोई भी बहस आप सबके के लिए ही है। इसमें आपकी जितनी ज़्यादा भागीदारी होगी उतना ही हम सार्थकता की और बढ़ पाएंगे।
कानून की नुमायन्दगी करने वाले भी मानते है कि ज्यादातर कानून बदलते वक्त में अपनी प्रासंगिकता खो रखे हैं। ये बहस वक्त की नज़ाक़त भी है। इसलिए ये बेहद ज़रूरी है कि समाज के हलक से अब आवाज़ निकले।
उन कानूनों पर खुल के चर्चा हो जिन्हें अब बदल देना ही चाहिए। उल्टा तीर का विस्तार हो रहा है। भावी कल के लिए एक सुखद संकेत है। साथ ही मैं आप सभी को इस पोस्ट के माध्यम से आमंत्रण भी दे रहा हूँ।
अगस्त के महीने में उल्टा तीर पूरे महीने आजादी का जश्न मनायेगा। आप सभी से अनुरोध है कि इस जश्ने-आज़ादी-२००८ में अपने लेख, विचार, कविताये, विश्लेषण आदि अपनी तस्वीर के साथ २५ जुलाई २००८ तक भेज कर आज़ादी के जश्न में खुल कर शिरकत करें।
पुनश्च;
"उल्टा तीर" आपका अपना मंच है।
इसमे खुल कर भाग लीजिये। और क़ानून पर अभी बहस जारी है मेरे दोस्त !!
सादर;
अमित के. सागर

मंगलवार, 1 जुलाई 2008

किस काम के क़ानून ?

किस काम के क़ानून?

"उल्टा तीर" इस बार फ़िर हाज़िर है एक नई बहस के साथ। 'क़ानून' जिससे हम सब का वास्ता है, कानून जिससे हमारा सीधा सम्बन्ध है। लेकिन येसे ही कितने क़ानून हैं जो समय के साथ अपना अर्थ खोते जा रहे हैं।

नए समय में क्या ये ज़रूरी हो चला है कि क़ानून में भी आमूल-चूल बदलाव हों?
उल्टा तीर पर इस बार पूरे महीने उन नियमों की, उन कायदों की खुली बहस जो आज के परिप्रेक्ष्य में आप्रसंगिक हो चुके हैं लेकिन फ़िर भी कायम हैं क़ानून की किताबों में, हमारे जीवन में।
पिछली बहस की बाबत उल्टा तीर (निष्कर्ष) जरुर पढिये। और भाग लीजिये इस नई बहस में खुलके। क्योंकि बहस अब शुरू हो चुकी है मेरे दोस्त...
आपका;
अमित के. सागर
(उल्टा तीर)

"एक चिट्ठी देश के नाम" (हास्य-वयंग्य) ***बहस के पूरक प्रश्न: समाधान मिलके खोजे **विश्व हिन्दी दिवस पर बहस व दिनकर पत्रिका 8th march Binny Binny Sharma DGP Domestic Violence Debate-2- FWB Friends With Benefits SHADI PAR BAHAS amit k sagar arrange marriage baby tube before marriage bharti boy chhindwada dance artist dating debate debate on marriage dharm ya jaati dongre ke 7 fere festival friendship ghazal girls http://poetryofamitksagar.blogspot.com/ my poems indian marriage law life or death love marriage mahila aarakshan man marriage marriage in india my birth day new blog poetry of amit k sagar police reality reality of dance shows reasons of domestic violence returning of ULTATEER rocky's fashion studio ruchika girhotra case rules sex shadi par sawal shobha dey society spouce stories sunita sharma tenis thoughts tips truth behind the screen ulta teer ultateer village why should I marry? main shadi kyon karun women अखबार आओ आतंकवाद से लड़ें आओ समाधान खोजें आतंकवाद आतंकवाद को मिटायें.. आपका मत आम चुनाव. मुद्दे इक़ चिट्ठी देश के नाम इन्साफ इस बार बहस नही उल्टा तीर उल्टा तीर की वापसी एक चिट्ठी देश के नाम एक विचार.... कविता कानून घरेलू हिंसा घरेलू हिंसा के कारण चुनाव चुनावी रणनीती जनसत्ता जागरूरकता जिन्दगी या मौत? तकनीकी तबाही दशहरा धर्म संगठनों का ज़हर नेता पत्नी पीड़ित पत्रिकारिता पुरुष प्रासंगिकता प्रियंका की चिट्ठी फ्रेंडस विद बेनेफिट्स बहस बुजुर्गों की दिशा व दशा ब्लोगर्स मसले और कानून मानसिकता मुंबई का दर्दनाक आतंकी हमला युवा राम रावण रिश्ता व्यापार शादी शादी से पहले श्रंद्धांजलि श्री प्रभाष जोशी संस्कृति समलैंगिक साक्षरता सुमन लोकसंघर्ष सोनी हसोणी की चिट्ठी ज़ख्म ताजा रखो मौत के मंजरों के १५ अगस्त

[बहस जारी है...]

१. नारीवाद २. समलैंगिकता ३. क़ानून (LAW) ४. आज़ादी बड़ी बहस है? (FREEDOM) ५. हिन्दी भाषा (HINDI) ६. धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद . बहस नहीं विचार कीजिये "आतंकवाद मिटाएँ " . आम चुनाव और राजनीति (ELECTION & POLITICS) ९. एक चिट्ठी देश के नाम १०. फ्रेंड्स विद बेनेफिट्स (FRIENDS WITH BENEFITS) ११. घरेलू हिंसा (DOMESTIC VIOLENCE) १२. ...क्या जरूरी है शादी से पहले? १३. उल्टा तीर शाही शादी (शादी पर बहस- Debate on Marriage)