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शनिवार, 3 अक्तूबर 2009

यहां फरेब है Friends With Benefits। [बहस 2]



अमित जी की जारी बहस "फ्रेंड्स विद बेनेफिट्स" को आगे बढाते हुए;
[सुनीता शर्मा]

अमित जी,आपने "फ्रेडसविदबेनीफिटस" से जो बहस शुरू की है वह होनी भी चाहिए थी तभी समाज में रह रहे तरह -तरह के लोगों के विचारों का पता चलता है. मैने अपने आलेख "लिव-इन-रिलेशनशिप" में बताया भी  है. 


इस तरह के रिश्तों के बारे में जो अधिकतर अभी तक महानगरों में है पर देर सवेर इनका असर छोटे शहरों पर भी दिखने लगेगा इसमें कोई अतिशयोक्ति नही है. क्योंकि लोग अपनी सहूलियत के लिए मिसाल ढूंढ लेते है कि वो भी तो ऎसा कर रहा फिर हम क्यों नही करे क्योंकि संस्कृति कैसी भी हो  कही न कही उसका स्थान्तरण दूसरे स्थानों पर भी हो ही जाता है। 

जों लोग बिना किसी भावना के सिर्फ दोस्ती के नाम पर शारारीरिक सबंध बना लेते है, उनका उददेश्य परिवार जैसी संस्था में नही होता. वो केवल अच्छी जिन्दगी जीने के लिए ही ऎसा करते है। उन लोगो में भावनाए अहम नही होती उन्हे केवल इनजायमेंट करना होता है या फिर बहुत से ऎसे भी होते है जो अपनी व्यस्ताओ के चलते परिवार नही रख पाते है। शेष फिर आगे की पोस्ट में-

4 टिप्‍पणियां:

  1. छोटे शहर का यह दुख है कि वह बड़ा क्यों नहीं है और बड़े शहर का यह कि वह छोटा क्यों नहीं । संस्कृति के संवाहक हम ही हैं इसलिये इसकी बदलती हुई परिभाषा के साथ जीवन व्यतीत करना हमारी नियति है ।हम इसकी सामोहिक परिभाषा बनते अवश्य हैं लेकिन वह देश कालानुसार बदलती रहती है । लिव इन रिलेशंशिप पूर्व में भी थी , परिवार नामक संस्था के बनने से पहले लेकिन इसके दुष्परिनाम सामने आने की वज़ह से इसे मान्यता नहीं मिली । अगर हमारे परिवार में ही आने वाली पीढ़ी मे यह घटित हो तो इसे हम कैसे रोक सकेंगे । इस तरह के बहुत सारे प्रश्न है ।

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  2. शरद जी,
    मै इस बात से सहमत हूं कि संस्कुति के सम्वाहक हम ही है,जो चीजे पहले थी आज भी है जब पहले दुष्परिणामों की वजह से इसे मान्यता नही मिली तो जैसे दुसरी जगहों पर मान्यता मिली हुई है क्या हमारे देश में भी मान्यता मिलनी चाहिए जो सहमत है वह तो चाहेगे ही न..... आप सब क्या सोचते है?

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  3. हाँ जो भी इसमे शामिल हैं... इसमे कोई शक नही है की वो सिर्फ इन्ज्वायमेंट की ही खोज करते पहुंचते है.....
    आगे क्या कहूँ क्योकि जिसे संस्था की उपमा मिली हुई है हमारे लिए वही श्रेष्ठ है......

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  4. Bina pyar ke shareer sambandh soch bhee nahee saktee...aur pyar rishton me bandhtehee dam todta hai..ye paraspar virodhee tathya hain...do balig log apnee marzeese kuchh nirnay len to koyee kuchh nahee kar sakta...lekin ek arajakta, aise anirbandh sambadhon se panap saktee hai...yahan sabse bada khatra hota hai...ek madhy maarg zarooree hai...jahan rishon me dam na ghute, aur pyar barqaraar rahe...

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आप सभी लोगों का बहुत-बहुत शुक्रिया जो आप अपने कीमती वक़्त से कुछ समय निकालकर समाज व देश के विषयों पर अपनी अमूल्य राय दे रहे हैं. इस यकीन के साथ कि आपका बोलना/आपका लिखना/आपकी सहभागिता/आपका संघर्ष एक न एक दिन सार्थक होगा. ऐसी ही उम्मीद मुझे है.
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बने रहिये हर अभियान के साथ- सीधे तौर से न सही मगर जुड़ी है आपसे ही हर एक बात.
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आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं!
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आभार
[उल्टा तीर] के लिए
[अमित के सागर]

"एक चिट्ठी देश के नाम" (हास्य-वयंग्य) ***बहस के पूरक प्रश्न: समाधान मिलके खोजे **विश्व हिन्दी दिवस पर बहस व दिनकर पत्रिका १५ अगस्त 8th march अखबार आओ आतंकवाद से लड़ें आओ समाधान खोजें आतंकवाद आतंकवाद को मिटायें.. आपका मत आम चुनाव. मुद्दे इक़ चिट्ठी देश के नाम इन्साफ इस बार बहस नही उल्टा तीर उल्टा तीर की वापसी एक चिट्ठी देश के नाम एक विचार.... कविता कानून घरेलू हिंसा घरेलू हिंसा के कारण चुनाव चुनावी रणनीती ज़ख्म ताजा रखो मौत के मंजरों के जनसत्ता जागरूरकता जिन्दगी या मौत? तकनीकी तबाही दशहरा धर्म संगठनों का ज़हर नेता पत्नी पीड़ित पत्रिकारिता पुरुष प्रासंगिकता प्रियंका की चिट्ठी फ्रेंडस विद बेनेफिट्स बहस बुजुर्गों की दिशा व दशा ब्लोगर्स मसले और कानून मानसिकता मुंबई का दर्दनाक आतंकी हमला युवा राम रावण रिश्ता व्यापार शादी शादी से पहले श्रंद्धांजलि श्री प्रभाष जोशी संस्कृति समलैंगिक साक्षरता सुमन लोकसंघर्ष सोनी हसोणी की चिट्ठी amit k sagar arrange marriage baby tube before marriage bharti Binny Binny Sharma boy chhindwada dance artist dating debate debate on marriage DGP dharm ya jaati Domestic Violence Debate-2- dongre ke 7 fere festival Friends With Benefits friendship FWB ghazal girls http://poetryofamitksagar.blogspot.com/ my poems indian marriage law life or death love marriage mahila aarakshan man marriage marriage in india my birth day new blog poetry of amit k sagar police reality reality of dance shows reasons of domestic violence returning of ULTATEER rocky's fashion studio ruchika girhotra case rules sex SHADI PAR BAHAS shadi par sawal shobha dey society spouce stories sunita sharma tenis thoughts tips truth behind the screen ulta teer ultateer village why should I marry? main shadi kyon karun women

[बहस जारी है...]

१. नारीवाद २. समलैंगिकता ३. क़ानून (LAW) ४. आज़ादी बड़ी बहस है? (FREEDOM) ५. हिन्दी भाषा (HINDI) ६. धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद . बहस नहीं विचार कीजिये "आतंकवाद मिटाएँ " . आम चुनाव और राजनीति (ELECTION & POLITICS) ९. एक चिट्ठी देश के नाम १०. फ्रेंड्स विद बेनेफिट्स (FRIENDS WITH BENEFITS) ११. घरेलू हिंसा (DOMESTIC VIOLENCE) १२. ...क्या जरूरी है शादी से पहले? १३. उल्टा तीर शाही शादी (शादी पर बहस- Debate on Marriage)