* उल्टा तीर लेखक/लेखिका अपने लेख-आलेख ['उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ'] पर सीधे पोस्ट के रूप में लिख प्रस्तुत करते रहें. **(चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक, ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिखें ) ***आपके विचार/लेख-आलेख/आंकड़े/कमेंट्स/ सिर्फ़ 'उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ' पर ही होने चाहिए. सधन्यवाद.
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रविवार, 6 सितंबर 2009

मेरी आवाज़ सुनो 'एक चिट्ठी देश के नाम'


"एक चिट्ठी देश के नाम" की श्रंखला में यह अगली चिट्ठी मुंबई से मराठी, हिंदी, अंगरेजी पर सामान अधिकार रखने वाली कई पुस्तकों की लेखिका, वर्तमान समय में ब्लोगिंग अन्य कई सामाजिक अभियानों में जुझारू रूप से जुड़ीं "शमा" जी ने उल्टा तीर को भेजी है. यह कम शब्दों वाली चिट्ठी में देश के प्रति लिखे गए वाक्यांश आपको हिला कर रख सकते हैं, क्योंकि यह चिट्ठी आपको अपने अन्दर झांकने को कहती है? क्या हम खुद से सचमुच इतने विमुख हो गए हैं कि हम ही एक प्रश्नचिन्ह हैं अपने आप पर? अगर आप सचमुच गंभीर हैं अपने माता रूपी देश के लिए तो यकीनन आपका हिल जाना और फिर इक नई ताकत और जोश के साथ खड़े हो जाना ही एक मात्र उद्धेश्य होना चाहिए! सीधे तौर पर बात करती हुई यह चिट्ठी प्रस्तुत है-

गर देश को हम माता मानते हैं तो ज़्यादातर देशवासी दर्शक, केवल दर्शक क्यों बने हुए है? हरेक व्यक्ति का अपनी ओर से निच्श्चय होना चाहिए इस माँ को बेहतर और बेहतर बनाने का. इस माँ की अस्मत बचाए रखने का. हाथ पे हाथ धरे न रहें. केवल राज नेताओं को दोष न दें. क्योंकि, वो लोग भी हमारे ही समाज की उपज हैं. हमारे ही माँ बहनों की कोख से पैदा हुए हैं. कहीँ अलग से निर्यात नही किए गए. तो आज हमें अपने ही गिरेबाँ में झाँकना है, देखना है कि पारिवारिक तथा सामाजिक संस्कारों में हम कहाँ चूक गए?

कहाँ हमारी घिसी पिटी न्याय व्यवथा चूक रही है. और है, तो हम कुछ क्यों नही करते...?? १९८१ से उच्चतम न्यायलय की अवमानता हो रही है...जब तक वो आदेश जो उस वक्त उच्चतम न्यायलय ने दिए थे, लागू नही होते, हम चाहे अफीम हो, गांजा हो चाहे हथियार हों...तस्करी से निजात नही पा सकते...

"आइये हाथ उठायें हम भी,
हम
जिन्हें रस्मो दुआ याद नही,
रस्मे
मुहब्बत के सिवा
कोई
बुत कोई खुदा याद नही॥!"
याद
करें इन अल्फाजों को...!


'मेरी ओरसे एक अदना-सी रचना: [रुत बदल दे !]

पार कर दे हर सरहद जो दिलों में ला रही दूरियाँ,
इन्सान से इंसान तक़सीम हो, खुदाने कब चाहा?
लौट
के आयेंगी बहारें, जायेगी ये खिज़ा,
रुत
बदल के देख, गर, चाहती है फूलना!
मुश्किल
है बड़ा, नही काम ये आसाँ,
दूर
सही, जानिबे मंजिल, क़दम तो बढ़ा!
-
कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।
*-*-*
बकौल लेखिका-
I, Shama a staunch Indian,have gone through many upheavals in life.There have been agonising moments,separation from my loved ones,but have also risen like the proverbial phoenix from my own ashes,time & again.How long I will be able do it is not known.But am here to share my agony & experience both.I am not atall a skilled write, yet,my devastating agony compelled me to write,without any technical knowledge of meterage etc.(Chhandme nahi likh sakti).There is prose too in english in the same blog.I hope I can communicate with my readers.Only then I will feel I have achieved something.For me communication is very important.
राईटर' ब्लॉग: http://shamasansmaran.blogspot.com/
http://lalitlekh.blogspot.com

1 टिप्पणी:

  1. एक भारतीय की चिट्ठी पसंद आई। पता नहीं कब जागेंगे हम लोग...
    कब शहीदों को बनावटी फूलों की श्रद्धांजलि देना बंद करेंगे।

    उत्तर देंहटाएं

आप सभी लोगों का बहुत-बहुत शुक्रिया जो आप अपने कीमती वक़्त से कुछ समय निकालकर समाज व देश के विषयों पर अपनी अमूल राय दे रहे हैं. इस यकीन के साथ कि आपका बोलना/आपका लिखना/आपकी सहभागिता/आपका संघर्ष एक न एक दिन सार्थक होगा. ऐसी ही उम्मीद मुझे है.
--
बने रहिये हर अभियान के साथ- सीधे तौर से न सही मगर जुडी है आपसे ही हर एक बात.
--
आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं!
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आभार
[उल्टा तीर] के लिए
[अमित के सागर]

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"एक चिट्ठी देश के नाम" (हास्य-वयंग्य) ***बहस के पूरक प्रश्न: समाधान मिलके खोजे **विश्व हिन्दी दिवस पर बहस व दिनकर पत्रिका १५ अगस्त 8th march अखबार आओ आतंकवाद से लड़ें आओ समाधान खोजें आतंकवाद आतंकवाद को मिटायें.. आपका मत आम चुनाव. मुद्दे इक़ चिट्ठी देश के नाम इन्साफ इस बार बहस नही उल्टा तीर उल्टा तीर की वापसी एक चिट्ठी देश के नाम एक विचार.... कविता कानून घरेलू हिंसा घरेलू हिंसा के कारण चुनाव चुनावी रणनीती ज़ख्म ताजा रखो मौत के मंजरों के जनसत्ता जागरूरकता जिन्दगी या मौत? तकनीकी तबाही दशहरा धर्म संगठनों का ज़हर नेता पत्नी पीड़ित पत्रिकारिता पुरुष प्रासंगिकता प्रियंका की चिट्ठी फ्रेंडस विद बेनेफिट्स बहस बुजुर्गों की दिशा व दशा ब्लोगर्स मसले और कानून मानसिकता मुंबई का दर्दनाक आतंकी हमला युवा राम रावण रिश्ता व्यापार शादी शादी से पहले श्रंद्धांजलि श्री प्रभाष जोशी संस्कृति समलैंगिक साक्षरता सुमन लोकसंघर्ष सोनी हसोणी की चिट्ठी amit k sagar arrange marriage baby tube before marriage bharti Binny Binny Sharma boy chhindwada dance artist dating debate debate on marriage DGP dharm ya jaati Domestic Violence Debate-2- dongre ke 7 fere festival Friends With Benefits friendship FWB ghazal girls http://poetryofamitksagar.blogspot.com/ my poems indian marriage law life or death love marriage mahila aarakshan man marriage marriage in india my birth day new blog poetry of amit k sagar police reality reality of dance shows reasons of domestic violence returning of ULTATEER rocky's fashion studio ruchika girhotra case rules sex SHADI PAR BAHAS shadi par sawal shobha dey society spouce stories sunita sharma tenis thoughts tips truth behind the screen ulta teer ultateer village why should I marry? main shadi kyon karun women

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