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बुधवार, 18 मार्च 2009

आप प्रधानमत्री हैं!

पहली बार उल्टा तीर बिना किसी भूमिका के आपसे बात करता है कि -

अगर आप प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवार बनते हैं और अंततः अगर आप "प्रधानमन्त्री" बन जाते हैं तो देश में क्या नया करना चाहेंगे और क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिसकी हम सबको नज़ाकत दिखती है? चूँकि पिछली पोस्ट में हुई चर्चा के तहत भी और अन्य तमाम लोगों से बात करने के बाद यह तो स्पष्ट हो ही गया है कि देश को परिवर्तन की ज़रुरत है. चूँकि देश में बहुसंख्यंक आबादी युवा है और तमाम तरह के संकट भी युवावों पर ही हैं तो क्यों न देश का प्रतिनिधत्व एक युवा करे बजाय किसी भी ६० या ७० बरस के प्रधानमन्त्री के! तो क्या आप प्रधानमन्त्री बनने या बनाने के लिए तैयार हैं? अपना मत दीजिये, बहस कीजिए, सवाल देश का है, आपका है, आपके विकास का है!

---
उल्टा तीर पर कुछ ज़ायज कारणों से पिछले काफी दिनों से कोई चर्चा न हो सकी, इसका हमें खेद है. उल्टा तीर अपनी सामजिक जिम्मेदारियां हर स्तिथि-परिस्तिथि में बखूबी निभाता रहेगा, ऐसी पूरी उम्मीद है. बस आपका साथ मिले, हम चाहते हैं जो बदलाव- वो ज़रूर हो- एक नए रूप में समाज खिले, ये देश हर तरह से उन्नति की राह चले...
[अमित के सागर]

8 टिप्‍पणियां:

  1. विषय बहुत उम्दा है. इस पर टिप्पणी लिखने के लिये बहुत वक्त की दरकार है.

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  2. अमित जी इस बहस मै आपने हमसे दो सवाल किये है पहला यदि मै प्रधानमंत्री बनू तो सबसे पहले सभी मौलिक अधिकारों और कर्तव्य हर व्यक्ति विशेष के लिए अनिवार्य करू साथ ही सरकार हर व्यक्ति को रोज़गार दे इस बात का विशेष प्रबंध करू
    दूसरा सवाल ६०से ७० बरस के व्यक्ति प्रधानमंत्री बने या १८ बरस का उससे कोई फर्क नहीं पड़ता यदि वो व्यक्ति कुछ करेगे ही नहीं तो कुछ नहीं होगा और यदि करते है तो उनसे बेहतर भी कोई नहीं हो सकता
    आपकी बहस पर बचपन से ही हम बच्चो से प्रस्ताव लिखाये गए है और मै इस पर प्रस्ताव नहीं केवल विचार लिख रही हूँ यदि भविष्य मै आप इस मुद्दे को अपनी वेब पत्रिका मै जगह दो तो मै अपने विचार खुल लिख सकती हूँ
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. अमित जी उल्टा तीर पर आप फिर एक बार सक्रिय होने जा रहे है जानकर ख़ुशी हुई
    आप अपना काम करते रहिये,आप बहुत बढ़िया काम कर रहेहै
    उल्टा तीर एक अच्छा और ज्ञानवर्धक सामाजिक हित का मंच है
    यह इसी तरह कायम रहे हम कामना करते है

    उत्तर देंहटाएं
  4. अमित जी सबसे पहले आपको बधाई की आज आप के कारण मै प्रधानमंत्री बनने के सपने देखू और कल ये सच हो तो इस बात की आपको हो बधाई दी जायेगी और जैसा की आपने पुछा उसी प्रकार जनता भी अगर नेताओ से पूछे की वो ऐशा क्या करने वाले है की उनको प्रधानमंत्री पद की होड़ मे शामिल होने का मौका मिले .............
    इन सब को छोड़ मै अपने विषय मै कहना चाहूगा की यदि भविष्य मे मै प्रधानमंत्री बना तो सबसे पहले जनता को ये अधिकार दूगा की वो मुझे और मेरे मातहत और साथ काम करने सभी व्यक्तियों के विषय मे जो सार्वंजनिक करने योग्य जानकारी हो वो सब पहले से ही उपलब्ध हो ,दूसरा ये की जो भी वादे किये जाये केवल उन्ही को प्राथमिकता के साथ पूरा करू और यदि किन्ही कारणों से ऐशा नहीं करू तो जनता को अपना त्यागपत्र दू और जनता मुझ पर धोखाधडी का मुकदमा दर्ज कर सके
    क्युकी जिस देश का प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री अपने जबान से झूट बोले उस देश और समाज का नष्ट होना ही उचित प्रतीत होता है
    अंत मे अमित जी हमारे देश मे बुजुर्ग सदेव सम्मानिये रहे है इसलिए उन्हें या नवयुवको किसी को भी देश का नेर्तत्व करने मे किसी अन्य को संकोच नहीं होना चाहिए लकिन उसका मानसिक ,शारीरिक ,बोद्धिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य होना चाहिए

    उत्तर देंहटाएं
  5. aapke blog main badi rochak bahas chalti hai .
    raajniti bada gambheer khel hai , ise samjhne ke liye hi bahut vakt chahiye.
    thaluye log hi is main bhavishy ajma sakte hain .
    kyoki unhain karne ke liye kuchh dikhta hi nahi hai .
    renu....

    उत्तर देंहटाएं
  6. amit ji,is baat se koi phark nahi padata ki aap kitne varsh ke hain.haan isase phark padata hai ki aap desh ke baare me kya sochte hain?har kadam par samjhotavaadi,dusaron ke isaaron par naachna,satta me bane rahne ke liye desh ki asmita se khilwaad karna,bhrastachaar,aatankwaad,jaatiwaad,kshtrawaad,tushtikarn,aarakshan,pradhanmantri banane ke baad bhi maatra apni paarti ke hit sochna aadi se phark padata hai.
    dusari baat agar main pradhanmantri banu to meri pahli prathmikata desh ke prati samman ka bhav paida karna,uprokat sabhi muddon ko chod kar ek rashtra ek naagrikata ka sidhant,garib,pichdon ko shiksha,swasthya muft tatha rojgar ke avsar,prathibhaaon ko bina aarakshan ke aage laana,shighra nayay ki vayavstha,bhrast tatha apraadhion ke chunav me bhag lene par rok,vikas ka laabh gaaon ki aur tatha bhartiya anusandhaan ko prathmikata ke saath aatmnirbhar swabhimaani yuvko ka nirman.swami vivekanand ne kaha tha* agar mujhe 100yogya maatain mil jaayen to main raashtra ki tasvir badal sakata hun* arthat mahilaaon ke liye bhi uchit shiksha ke avsar taaki vah apni santan ko yogya naagrik bana sake.
    dhanyavaad

    dr.a.kirtivardhan
    09911323732
    a.kirtivardhan@gmail.com
    a.kirtivardhan@rediffmail.com

    उत्तर देंहटाएं
  7. amit ji ,pradhanmantri banane ke liye umra ki nahi vichaaron me tatha soch me majbooti ki jarurat hoti hai.
    dr.a.kirtivardhan

    उत्तर देंहटाएं
  8. मै क्या चाहूँगी ? पढ़ें :

    http://shamasansmaran.blogspot.com

    या फिर

    http://lalitlekh.blogspot.com

    दिलो जान से चाहती हूँ ,कि , हमारे घिसे पिटे क़ानून बदलें ..जन जाग्रति हो ...

    जब तक क़ानून नही बदलते , ना हम आतंक का सामना कर सकते हैं , ना इन्साफ की अपेक्षा रख सकते हैं ..सबसे पहले , हमें आज़ादी की दूसरी जंग लड़नी होगी ..इन क़ानूनों से छुटकारा पाने के लिए ..

    उत्तर देंहटाएं

आप सभी लोगों का बहुत-बहुत शुक्रिया जो आप अपने कीमती वक़्त से कुछ समय निकालकर समाज व देश के विषयों पर अपनी अमूल राय दे रहे हैं. इस यकीन के साथ कि आपका बोलना/आपका लिखना/आपकी सहभागिता/आपका संघर्ष एक न एक दिन सार्थक होगा. ऐसी ही उम्मीद मुझे है.
--
बने रहिये हर अभियान के साथ- सीधे तौर से न सही मगर जुडी है आपसे ही हर एक बात.
--
आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं!
--
आभार
[उल्टा तीर] के लिए
[अमित के सागर]

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[बहस जारी है...]

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