* उल्टा तीर लेखक/लेखिका अपने लेख-आलेख ['उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ'] पर सीधे पोस्ट के रूप में लिख प्रस्तुत करते रहें. **(चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक, ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिखें ) ***आपके विचार/लेख-आलेख/आंकड़े/कमेंट्स/ सिर्फ़ 'उल्टा तीर टोपिक ऑफ़ द मंथ' पर ही होने चाहिए. सधन्यवाद.
**१ अप्रैल २०११ से एक नए विषय (उल्टा तीर शाही शादी 'शादी पर बहस')के साथ उल्टा तीर पर बहस जारी...जिसमें आपका योगदान अपेक्षित है.*[उल्टा तीर के रचनाकार पूरे महीने भर कृपया सिर्फ और सिर्फ जारी [बहस विषय] पर ही अपनी पोस्ट छापें.]*अगर आप उल्टा तीर से लेखक/लेखिका के रूप में जुड़ना चाहते हैं तो हमें मेल करें या फोन करें* ULTA TEER is one of the well-known Hindi debate blogs that raise the issues of our concerns to bring them on the horizon of truth for the betterment of ourselves and country. आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं! *आपका - अमित के सागर E-mail: ocean4love@gmail.com, ultateer@gmail.com, Mob: +91- 9990 181944

शुक्रवार, 23 मई 2008

बहस के पूरक प्रश्न : ज़रा ये भी सोचिये ? बहस वही (२)










जरा ये भी सोचिये...

बहस के पूरक प्रश्न...

...
पुलिस ने आरुषी हेमराज हत्या का परदा फाश कर दिया आरोपी और कोई नही बल्कि आरुषी के पिता ने ही उसकी हत्या की आरुषी की मौत बीते पूरे हफ्ते मीडिया की सबसे अहम् खबर रही
टेलिविज़न की ख़बरों मे पिछले हफ्ते केवल आरुषी मर्डर ही मुख्य हेडलाइन रहा और तो और इस ख़बर के कारण जयपुर ब्लास्ट जैसी अहम् ख़बर भी नेपथ्य में चली गयी इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने अपनी पूरी ऊर्जा और ताक़त संसाधन बस नॉएडा के इस डबल मर्डर पर ही झोंक दी हर घर मे हर गली में जेम्स बोंड /गोपीचंद जासूस पैदा हो गए ? ये मर्डर लोगो की पे चढ़ गया, कुछ मुद्दे दब गए, कयासों का बाज़ार गर्म हो गया लोग इस पहेली को अपने अपने ढंग से सुलझाने लगे हमारे सवाल इस मर्डर की गुत्थी से भी बड़े हैं "क्या बड़े शहरों मे मानवीय संवेदनाएं दम तोड़ने लगी है ? " परिवार टूटने और बिखरने लगे हैं ? रिश्तो के मायने बदलने लगे हैं? नारीवाद पर हमारी बहस अब अभी भी जारी है...इस मर्डर केस ने एक तरह से हमारे उस दावे को मजबूती दे दी है जिसमे हमारे एक पाठक ने ये कहा था कि वक्त गया है कि अब टूटते बिखरते परिवारों को सँभालने के लिए महिलाये घर के भीतर कर परिवारों को सहारा दे कुदरती तौर से महिलाएं प्रेम शक्ती की अद्भुत कृति हैं महिलाएं परिवार के दायित्व को समझे तभी जाकर भविष्य में इस तरह की वारदात नही घटेंगी आज बड़े शहरों मे माँ और बाप काम पे चले जाते हैं बच्चे घर मे दोनों के प्यार के लिए तरसते रह जातें हैं नई पीढ़ी माँ बाप के प्रेम से वंचित है आरुषी का केस इसलिए (खास तौर से समूची नारी जाति के लिए एक आई ओपनर है यही घड़ी है नारी समाज अब समाज राष्ट्र भावी पीढ़ी के हित में घरो की ओर अपना रुख कर ले कहीं ऐसा हो कोई आरुषी फिर शिकार बन जाए ..ज़रा सोचिये !!

अपनी राय प्रतिक्रियाएँ भेजते रहिये क्योंकि बहस अभी जारी है मेरे दोस्त...
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ये तो हुआ बहस का एक पहलू जो हमे एक पाठक ने भेजा है। इस राय पर अपने विचार दीजिये क्योंकि बहस अभी बाकी है मेरे दोस्त !! "उल्टा तीर" पढ़ते रहिये.

**उल्टा तीर मे प्रकाशित किसी भी विचार के लिए ब्लॉग मोडरेटर की कोई जिम्मेवारी नही है। पाठक के अनुरोध पर उनका नाम गोपनीय रखा गया है
(उल्टा तीर:तीर वही जो घायल कर दे )

4 टिप्‍पणियां:

  1. अमित जी आपके सवाल का जवाब मैंने यहाँ दिया है ..आपके विचार वहाँ आमंत्रित हैं ..क्यूंकि वाकई अभी बहस जारी है :)

    http://ranjanabhatia.blogspot.com/2008/05/blog-post_24.html

    उत्तर देंहटाएं
  2. अमितजी ,आपकी बहस ने वाकई में कई सवाल खडे कर दिए हैं .लेकिन मैं आपके ब्लोग पर इस बहस के सूत्रधार (आपके पाठक ) से कुछ मामलों मे नारी होते हुए भी सहमत हूँ .यकीनन ये बात सौलह आने सच है कि समाज में संस्कारों अच्छे विचारों और मानवीय मूल्यों की जननी सिर्फ और सिर्फ नारी ही है . बहस के सूत्रधार से मैं इस बात पर भी सहमत हूँ कि प्रकृति ने नारी जाति को भावनाओं से भरकर समाज को एक नया अर्थ प्रदान किया है . अब सवाल उठता है कि क्या केवल नारी की ही ये जिम्मेदारी है .दरअसल , पुरुष और नारी ये रथ के वो पहिये है जो साथ साथ चलकर ही समाज को परिवार को नयी दिशा दे सकते हैं .परिवार को बचाने के लिए नारी इस त्याग के लिए भी तैयार हो भी जाये और घर मे बैठ जाये तब भी क्या पुरुष उसे वो सम्मान और हक देगा मेरा यही सवाल है . ये बहस वाकई में गंभीर है ..इसकी गंभीरता बनी रहे ..मेरी यही राय है.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. arthik rup se sudhid chahe nari ya purush ghar samalne valo ko apne se chota manta hai

      हटाएं
  3. mere vichar se upbhoktawadi sanskriti iske liye kafi jimmedaar hai.aaj na to sanukt pariwar hai aur na hi kisi ke paas samay ki woh apne pariwar ko dhang se de sake.
    shyad ye aapke poorak prashno ke uttar ke kuchh ansh ho sakte hain.

    उत्तर देंहटाएं

आप सभी लोगों का बहुत-बहुत शुक्रिया जो आप अपने कीमती वक़्त से कुछ समय निकालकर समाज व देश के विषयों पर अपनी अमूल राय दे रहे हैं. इस यकीन के साथ कि आपका बोलना/आपका लिखना/आपकी सहभागिता/आपका संघर्ष एक न एक दिन सार्थक होगा. ऐसी ही उम्मीद मुझे है.
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बने रहिये हर अभियान के साथ- सीधे तौर से न सही मगर जुडी है आपसे ही हर एक बात.
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आप सभी लोगों को मैं एक मंच पर एकत्रित होने का तहे-दिल से आमंत्रण देता हूँ...आइये हाथ मिलाएँ, लोक हितों की एक नई ताकत बनाएं!
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आभार
[उल्टा तीर] के लिए
[अमित के सागर]

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